
चाईबासा : नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त करने वाले शहीद रूमुल सावैयां का 11वां शहीद दिवस मंगलवार को उनके पैतृक गांव तांतनगर प्रखंड के उलीडीह में मनाया गया। इसमें मुख्य अतिथि डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा एवं विशिष्ट अतिथि सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बहामन टूटी सहित शहीद के दोनों बेटे समेत एवं ग्रामीणों ने शहीद रूमुल सावैयां को नम आंखों से पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर पुलिस प्रशासन की ओर से शहीद के परिजनों को शॉल ओढ़ाकर कर सम्मानित किया गया।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिलाध्यक्ष ने किया नमन
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने शहीद रूमुल सवैयां के परिजनों के साथ उलीडीह स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उपस्थित लोगों ने वीर शहीद के बलिदान को नमन करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेरसिंह बिरुवा ने कहा कि शहीद रूमुल सवैयां केवल एक वीर योद्धा ही नहीं, बल्कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सरल, सहज एवं मिलनसार व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे। उन्होंने देश और समाज की सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने कहा कि वीर शहीदों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीद रूमुल सवैयां की स्मृति और उनके आदर्शों को जीवंत रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
मौके पर शहीद रूमुल सवैयां के परिवार के सदस्यों सहित ओपी प्रभारी अरविंद कुशवाहा, जिला सचिव ओयबन हेंब्रम, पूर्व मुखिया नटवर लाल बिरुवा, सुखलाल सरदार, छोटा सवैयां, पंकज गोप सहित कापी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
नक्सलियों से डटकर मुकाबला किया था रूमुल सावैयां
अक्टूबर 2008 को आरक्षी के पद पर नियुक्त हुए थे। उन्होंने विभिन्न जिलों के पुलिस पिकेट में प्रतिनियुक्त रहकर अपने कर्तव्य का निष्पादन लगन एवं मेहनत से किया। 18 अगस्त 2015 को वरीय पुलिस अधीक्षक रांची प्रभात कुमार को सूचना मिली कि भाकपा माओवादी द्वारा एक क्रेशर व्यवसायी को लेवी प्राप्त करने के उद्देश्य से लाडुप दुलमी जंगल में बुलाया गया है। सूचना के आधार पर समय की कमी तथा अभियान की आवश्यकता को ध्यान में रखकर वरीय पुलिस अधीक्षक स्वयं अपने नेतृत्व में दुलमी जंगल में टीम के साथ पहुंचे। पुलिस बल के पहुंचते ही माओवादियों द्वारा पुलिस बल पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। सपोर्ट टीम के दूर रहने तथा पुलिस बल की संख्या कम होने के बावजूद भी पुलिस बल ने साहस, बहादुरी एवं संयम का परिचय देते हुए डटकर मुकाबला किया। इस मुठभेड़ में झारखंड पुलिस के कर्तव्यनिष्ठ चालक आरक्षी 3391 रूमुल सावैयां वीरगति को प्राप्त हुए। इस हमले में एसएसपी प्रभात कुमार भी जख्मी हुए थे। तांतनगर प्रखंड अंतर्गत उलीडीह गांव में जन्मे शहीद रूमुल सवैयां ने अपने गांव में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद हाई स्कूल चिटीमिटी से मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। अत्यंत गरीब परिवार से होने के कारण वे पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के चालक के रूप में काम करते थे। इसी दौरान उन्हें झारखंड पुलिस में नौकरी मिल गई थी।
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