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Jagannath Temple : जगन्नाथ मंदिर की चारदीवारी में आई दरारें, ASI से मांगी गई मदद

ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर मंदिर के अंदर स्थित आनंद बाजार क्षेत्र से खराब पानी दीवारों में जा रहा है, जिससे दीवार के कुछ हिस्सों में नमी जमा हो गई है। नमी के कारण दीवार कमजोर होती जा रही है, जिससे इसके ढहने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

by Rakesh Pandey
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पुरी: 12वीं शताब्दी में निर्मित इस ऐतिहासिक दीवार में आई दरारें मंदिर की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा रही हैं। दरअसल, ‘मेघना द पचेरी’ के नाम से प्रचलित ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की चारदीवारी में दरारें पड़ रही हैं। यह दीवार सदियों से मंदिर परिसर की सुरक्षा करती आ रही है, लेकिन अब दरारों के कारण सेवादारों, श्रद्धालुओं और इतिहासकारों के बीच चिंता का माहौल है।

दीवार में दरारों का कारण


जानकारी के अनुसार, मंदिर के अंदर स्थित आनंद बाजार क्षेत्र से खराब पानी दीवारों में जा रहा है, जिससे दीवार के कुछ हिस्सों में नमी जमा हो गई है। नमी के कारण दीवार कमजोर होती जा रही है, जिससे इसके ढहने का खतरा उत्पन्न हो गया है। आनंद बाजार वह स्थान है जहां भगवान जगन्नाथ के भक्तों के लिए भोग प्रसाद तैयार होता है। इस दीवार के कमजोर होने से आस-पास की संरचनाओं और मंदिर की सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

ASI से मदद की अपील

मंदिर प्रशासन और ओडिशा सरकार ने इस प्राचीन दीवार की मरम्मत के लिए Archaeological Survey of India (ASI) से तत्काल सहायता मांगी है। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा, “हम दरारों के कारणों की जांच कर रहे हैं। ASI मरम्मत और डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है, लेकिन हमें संदेह है कि कुछ ऐसा हुआ है, जिससे ASI ने पहले ही प्रतिबंधित किया था। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

धरोहर के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास

मंदिर प्रशासन ने ASI से अनुरोध किया है कि मेघना द पचेरी का निरीक्षण करके इसकी दरारों की मरम्मत की जाए। ओडिशा सरकार और मंदिर प्रशासन इस सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। मंदिर की सुरक्षा और इसकी पुरानी दीवार के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए, प्रशासन और राज्य सरकार ने व्यापक योजना पर कार्य करने का निर्णय लिया है।

समय पर मरम्मत नहीं होने पर होगी समस्या

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर मरम्मत नहीं की गई तो दीवार की संरचना और मंदिर परिसर को गंभीर नुकसान हो सकता है। राज्य सरकार और ASI ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए मंदिर की ऐतिहासिक दीवार के संरक्षण की दिशा में त्वरित और ठोस कदम उठाने का संकल्प लिया है।

जगन्नाथ मंदिर की चारदीवारी में आई दरारें एक महत्वपूर्ण चेतावनी हैं कि सांस्कृतिक धरोहरों की सुरक्षा और संरक्षण पर ध्यान देना आवश्यक है। इससे न केवल धार्मिक आस्था जुड़ी है, बल्कि इसका ऐतिहासिक महत्व भी है। ASI और राज्य सरकार के प्रयासों से इस धरोहर की सुरक्षा की दिशा में कदम उठाए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखा जा सके। इस संकट से निपटने के लिए सही समय पर कार्रवाई करना आवश्यक है, जिससे कि इस ऐतिहासिक स्थल की महत्ता और सुंदरता बरकरार रहे।

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