जमशेदपुर : 14 फरवरी को ‘वैलेंटाइन डे’ के रूप में मनाने की परंपरा देश में भी बहुत प्रचलित हो गई है। हिंदू जनजागृति समिति के पूर्व व पूर्वोत्तर भारत समन्वयक शंभू गवारे कहते हैं कि जिस वैलेंटाइन को ईसाईयों के धर्मगुरु पोप ने ही ‘इस नाम का कोई संत नहीं’, ऐसा कहकर रोमन दिनदर्शिका से बहुत पहले ही हटा दिया, उसके नाम से भारत में ‘प्रेम दिवस’ मनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
वैलेंटाइन डे पूरे विश्व में विशेषतः अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया इत्यादि देशों में मनाया जाता है तथा वर्तमान समय में यह दिवस भारत में भी अन्य त्योहार के समान मनाया जा रहा है। ‘वैलेंटाइन डे’ के दिन अनुचित घटनाएं भी होती हैं। युवतियों पर अत्याचार की घटनाएं तथा मद्यपान करना आदि कृत्य युवा पीढ़ी द्वारा किए जाते हैं । एक रिपोर्ट के अनुसार इस दिन निरोध तथा गर्भनिरोधक गोलियों की खपत 10 गुना ज्यादा बढ़ जाती है ।
भारत में 7 फरवरी से 14 फरवरी तक रोज डे, प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रॉमिस डे, किस डे, हग डे एंड वैलेंटाइन डे ऐसे कुल मिलाकर आठ दिवस मनाए जाते हैं। इतने दिन तो विदेश में भी नहीं मनाए जाते। इसी से ध्यान में आता है कि भारत की सामाजिक स्थिति कितनी गिर गई है!
फूल देकर सच्चा प्रेम व्यक्त नहीं होता
पश्चिमी सभ्यता वाले देशों में लड़कियों एवं स्त्रियों को फूलों के गुच्छे की अत्यधिक चाह होती है। उन्हें लगता है कि फूल देने वाला उनसे यथार्थ रुप से प्रेम करता है। भारत में भी इस दिन प्रेम व्यक्त करने हेतु युवक-युवतियों को गुलाब का फूल अथवा गुच्छा देते हैं। हिंदू धर्म में प्रेम व्यक्त करने के लिए कभी गुलाब का फूल अथवा फूलों का गुच्छा (bouquet) नहीं दिया जाता। फूल देवी-देवताओं को अर्पित किए जाते हैं। दरवाजे पर फूलों का तोरण बनाकर लगाया जाता है। सात्त्विकता बढ़ाने के लिए गजरा बना कर सिर पर लगाते हैं तथा शुभ अवसर पर उपयोग में लाते हैं।
चरम सीमा पर पहुंची अनैतिकता!
कामवासना की पूर्ति के उद्देश्य से अधिकांश लडके-लड़कियां वैलेंटाईन डे मनाते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत से अधिक लडके, लड़कियों से लैंगिक संबंध रखने हेतु यह दिवस मनाते हैं। गर्भनिरोधक बनाने वाली कंपनियों के मतानुसार अन्य दिनों की तुलना में इस दिन को गर्भनिरोधकों की बिक्री अधिक होती है। इसका अर्थ यही है कि अविवाहित लड़के-लड़कियां इस दिन लैंगिक संबंध रखते हैं। फलस्वरूप अविवाहित लड़कियों को गर्भपात भी करना पड़ता है। संक्षेप में इससे सामाजिक स्वास्थ्य बिगड़ता है। हिंदू धर्म में विवाह से पूर्व लैंगिक संबंध रखना निषिद्ध माना गया है।
क्रांतिकारियों को न भूलें!
अपनी संस्कृति के अनुसार व्यक्ति की अपेक्षा परिवार, परिवार की अपेक्षा समाज एवं समाज की अपेक्षा देश अधिक महत्त्वपूर्ण है, यही दृष्टिकोण रखकर भगत सिंह, राजगुरू एवं सुखदेव समान अनेक वीरों ने अपना यौवन अर्पण किया, जिसके कारण हमें स्वतंत्रता मिली । यदि वैलेंटाइन को प्रेम का संदेश मानकर वे विवाह कर बैठ जाते, तो क्या हमें स्वतंत्रता की प्राप्ति होती?
समाज व्यवस्था को उद्ध्वस्त करने वाला ‘वैलेंटाईन डे’
इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स इ-दैनिक के अनुसार ‘वैलेंटाईन डे’ के दिन सुसाइड हेल्पलाइन पर सबसे अधिक फोन आते हैं। वैलेंटाइन डे के दिन अपने मन के अनुसार प्रेम न मिलने से उत्पन्न अकेलापन एवं भग्न मानसिकता उसके लिए कारणभूत है। इस प्रकार हम समाज व्यवस्था को उद्धस्त करने वाला एवं अनेक व्यक्तियों को निराशा में धकेलने वाला दिवस मनाने के पीछे क्यों पडे हैं?
पाकिस्तान में भी वैलेंटाइन डे पर प्रतिबंध
पाकिस्तान के एक उच्च न्यायालय ने 14 फरवरी को वैलेंटाइन डे मनाने पर रोक लगा दी थी। पाकिस्तान के उच्च न्यायालय के अनुसार सोशल मीडिया पर वैलेंटाइन डे को बढ़ावा देना ‘इस्लाम के विरुद्ध’ है, न्यायालय ने सभी प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को भी वैलेंटाइन डे को बढ़ावा देने को तुरंत रोकने की चेतावनी भी दी। उन्होंने मीडिया को जांच करने और ऐसे किसी भी प्रमोशन को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया था। (स्रोत : नवभारत टाइम्स) राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने भी वैलेंटाइन डे को मुस्लिम परंपराओं के विरुद्ध बताते हुए देश के लोगों से इसको न मनाने की अपील की थी।
मित्रों को भी धर्माचरण करने की प्रेरणा दें
‘वैलेंटाईन डे’ एवं इस प्रकार के अन्य डे पाश्चात्त्यों द्वारा स्थापित की गई कुप्रथाएं हैं। यदि हमने हिंदू धर्म का अभ्यास कर उसका आचरण किया, तो जन्म-मृत्यु से परे जाना संभव होता है। इस प्रकार के डे मनाने पर हमें जो सुख मिलता है; उस सुख के भी आगे का आनंद देने की क्षमता हिंदू धर्म की सीख में है; इसलिए ‘वैलेंटाईन डे’ समान दिवस मनाने की अपेक्षा हिंदू धर्म की उचित शिक्षा लेकर धर्माचरण करें एवं अपने मित्रों को भी वैसा करने हेतु प्रेरित करें। ध्यान में रखें कि जो धर्म का पालन करता है, धर्म उसी का पालन (पोषण) करता है।

