कोलकाता : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के पाथरप्रतिमा इलाके में सोमवार रात एक भीषण विस्फोट ने आठ लोगों की जान ले ली। इस हादसे में एक ही परिवार के चार बच्चे और दो बुजुर्गों समेत आठ लोगों की मौत हो गई, जिनमें से दो बच्चे एक साल से भी कम उम्र के थे। यह विस्फोट पटाखा निर्माण की वजह से हुआ, जिसे अवैध बताया जा रहा है। घटना के बाद से इलाके में प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
भीषण विस्फोट से भारी नुकसान
सोमवार रात दक्षिण रायपुर इलाके के ढोलाहाट थाना क्षेत्र में एक पटाखा कारखाने में जोरदार धमाका हुआ। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पूरे घर में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 65 वर्षीय अरविंद बनिक, 80 वर्षीय प्रभावती बनिक, 28 वर्षीय सांत्वना बनिक, 9 साल के अर्णब बनिक, 6 साल की अनुष्का बनिक, 8 महीने की अस्मिता बनिक, 6 महीने का अंकित बनिक और तुषार बनिक की पत्नी रूपा बनिक की मौत हो गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह घर लंबे समय से अवैध रूप से पटाखे बनाए जाने का केंद्र बना हुआ था। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि परिवार के पास ग्रीन क्रैकर (पर्यावरण अनुकूल पटाखे) बनाने का वैध लाइसेंस था। लेकिन इलाके के लोग इस पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं और उनका कहना है कि इस लाइसेंस की आड़ में अवैध पटाखे बनाए जा रहे थे।
प्रशासन पर उठ रहे सवाल
इस भयंकर हादसे के बाद प्रशासन और पुलिस की भूमिका को लेकर स्थानीय लोगों ने कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका आरोप है कि अगर पहले इस अवैध पटाखा निर्माण को रोका गया होता, तो इस प्रकार का भयंकर हादसा टल सकता था। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, प्रशासन के पास इस परिवार की गतिविधियों की जानकारी थी, लेकिन बावजूद इसके कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
विधायक का बयान और जांच
घटना के बाद क्षेत्रीय विधायक समीर जाना ने मंगलवार सुबह कहा कि परिवार के पास वैध लाइसेंस था और पटाखों का निर्माण घर से दूर एक अन्य स्थान पर किया जाता था। हालांकि, घर में कुछ पटाखे रखे गए थे, जिस कारण यह हादसा हुआ। विस्फोट के तुरंत बाद घटनास्थल से छह शवों को बरामद किया गया। इस मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की एक टीम मौके पर पहुंची और कारणों का पता लगाने के लिए नमूने इकट्ठा किए। प्रशासन ने इस मामले में गहन जांच के आदेश दिए हैं।

