
भारत सरकार ने 8 मई 2025 को एक नई एडवाइजरी जारी की है, जिसमें सभी OTT प्लेटफॉर्म्स, मीडिया स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल इंटरमीडियरीज को पाकिस्तान मूल की सभी सामग्री हटाने का निर्देश दिया गया है। यह कदम हाल ही में हुए आतंकवादी हमलों और बढ़ते सीमा तनावों के मद्देनजर उठाया गया है।
नई गाइडलाइंस का उद्देश्य और कानूनी आधार
भारत सरकार की यह एडवाइजरी सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा जारी की गई है, जो सूचना प्रौद्योगिकी नियम 2021 (IT Rules 2021) के तहत आती है। इसमें विशेष रूप से उन सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया है जो:
• भारत की संप्रभुता और अखंडता को प्रभावित करती है।
• राज्य की सुरक्षा को खतरे में डालती है।
• भारत के विदेशों के साथ मित्रवत संबंधों के लिए हानिकारक है।
• हिंसा को बढ़ावा देती है या भड़काती है।
यह निर्देश OTT प्लेटफॉर्म्स, मीडिया स्ट्रीमिंग सेवाओं और डिजिटल इंटरमीडियरीज को लागू करने के लिए कहा गया है।
आतंकवादी हमला और ऑपरेशन सिंदूर
यह निर्णय 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद लिया गया है, जिसमें 26 पर्यटकों की जान गई थी। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने ली थी, जो लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी है। भारत सरकार ने इस हमले का पाकिस्तान से संबंध होने का आरोप लगाया है।
इसके बाद, 7 मई 2025 को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।
सोशल मीडिया और नेटिज़न्स के रिएक्शन
भारत सरकार के इस कदम पर सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिली हैं। कुछ यूज़र्स ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया है, जबकि कुछ ने इसे सांस्कृतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध के रूप में देखा है। पाकिस्तानी संगीत कार्यक्रम ‘कोक स्टूडियो’ के प्रशंसकों ने इसकी बंदी पर अफसोस जताया है।
भविष्य की दिशा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उठाया गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संयम और संवाद की अपील की गई है, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे।
भारत सरकार की इस एडवाइजरी का उद्देश्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर पाकिस्तान मूल की सामग्री को हटाना है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा हो सकती है। यह कदम हाल के आतंकवादी हमलों और बढ़ते सीमा तनावों के मद्देनजर उठाया गया है।

