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Chaibasa Tribal Unity Fest : चाईबासा में सादगी और परंपरा के साथ मनाया गया विश्व आदिवासी दिवस, 50 से अधिक लोगों को मिला सम्मान

दिशोम गुरु' स्व. शिबू सोरेन को समर्पित रहा इस वर्ष का आयोजन

by Vivek Sharma
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Chaibasa (Jharkhand) : सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में विश्व आदिवासी दिवस इस बार सादगी और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इस वर्ष का कार्यक्रम दिसुम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित था। आयोजन की शुरुआत सभी आदिवासी समुदायों के पुजारियों ने पारंपरिक पूजा-पाठ से की, जिसके बाद सामूहिक गोवारी (प्रार्थना) संपन्न हुई। उपस्थित लोगों ने स्व. शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए 2 मिनट का मौन रखा।

कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, खरसावां के विधायक दशरथ गगराई, जिला प्रशासन के अधिकारी, अन्य अतिथि और हजारों स्थानीय लोग मौजूद थे।

सांस्कृतिक नृत्यों से सजी शाम

कार्यक्रम में विभिन्न आदिवासी समुदायों की नृत्य टीमों ने अपनी पारंपरिक कला प्रस्तुत की।

इन टीमों ने की नृत्य की प्रस्तुति

  • भारत मुण्डा समाज नृत्य टीम
  • उरांव समाज बान टोला नृत्य टीम
  • नदीपार उरांव समाज नृत्य टीम
  • हो ट्रेडिशनल सुसुन टीम, हरिगुटू चाईबासा
  • संथाल समाज नृत्य टीम
  • फुलहातु उरांव समाज नृत्य टीम
  • पुलिस लाइन नृत्य टीम
  • उरांव समाज मेरी टोला नृत्य टीम
  • हो समाज नृत्य टीम

इन विषयों पर हुई चर्चा

  • आधुनिक युग में आदिवासी युवाओं का भविष्य और चुनौतियां
  • आदिवासी भाषा-लिपि का संरक्षण एवं विकास
  • झारखंड में स्थानीय और नियोजन नीति
  • आदिवासी/सरना कोडा की अस्मिता और पहचान
  • PESA 1996, पारंपरिक व्यवस्था और स्वायत स्वशासन
  • आदिवासी भाषा दशक में भाषा, धर्म और धर्मांतरण से बचाव

सम्मान समारोह में झलकी प्रेरणा

आयोजन में 50 से अधिक लोगों को सम्मानित किया गया। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग में सफल अभिषेक पिंघुवा, कृति सिंह कुंटिया, प्रियंका हेम्ब्रम, संदीप बंकिरा, रसिका जामुदा, प्रीति देवगम, इपिल अंकिता हेम्ब्रम, अमनदीप बिरूवा, कश्मीरा हेम्ब्रम, अमंत पाड़ेया शामिल थे।

वहीं खेल, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, कला, समाज सेवा, स्वास्थ्य, पशुपालन और संस्कृति में उत्कृष्ट कार्य करने वाले—बसंती बिरहोर, जितेन सोरेन, अजय जोंको, सोम सागर सिंकु, सुमन सौरभ सिंकु, आकाश हेम्ब्रम, लालू कुजुर, विश्वनाथ लकड़ा, पारस खलखो, विवेक खलखो, लीसा बरहा, गणेश टोप्पो, अंकुल कच्छप, जयपाल सिरका, रमेश्वर बिरूवा, सुशीला बिरूवा, सोमा जेराई, जवाहर लाल बंकिरा, डॉ. हिरेन्द्र बिरूवा, श्याम बोबोंगा, बिरसिंह तामसोय, कार्तिक चन्द्र नाग, डॉ. सृष्टि समान्ता, लखी मुण्डा, स्वीटी कुमारी, राज लक्ष्मी सिंकू को सम्मानित किया गया।

परंपरा और स्वाद के स्टॉल बने आकर्षण

कार्यक्रम स्थल पर 100 से अधिक स्टॉल लगाए गए, जिनमें पारंपरिक परिधान और व्यंजन की बिक्री हुई। आयोजन में सविता सिंकू, अमर लकड़ा, सेकोर बनम, प्रियंका कालुंडिया, बंधुराम सोय, प्रश्न बिरुआ, सुमी हेम्ब्रम, शशिकला पूर्ति, सुनिता बारी, पीरू होनहागा, पंकज खलखो, बिमला बरहा, राजु राज बिरूली समेत विभिन्न समाज और संगठनों के पदाधिकारियों ने अहम भूमिका निभाई।

इस मौके पर चाईबासा, मनोहरपुर, गुवा, नोवामुंडी, जमशेदपुर, रांची के अलावा राज्य और देश के अन्य हिस्सों से लोग शामिल हुए, जिससे आयोजन को व्यापक जनसमर्थन मिला।

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