
Jamshedpur : झारखंड में अभी एसआईआर नहीं हो रहा है। प्रदेश में प्री-एसआईआर ( प्री स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) चल रहा है। इसके तहत, बीएलओ ((बूथ लेवल ऑफिसर) सभी वोटर्स की मैपिंग कर रहे हैं। मैपिंग के लिए निर्वाचन आयोग ने स्पेशल सॉफ्टवेयर बनाया है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से ही मैपिंग की जा रही है। मैपिंग के तहत देखा जा रहा है कि वर्तमान में झारखंड में जो वोटर हैं उनका नाम साल 2003 में मतदाता सूची में था या नहीं।
बीएलओ अपने सॉफ्टवेयर के जरिए ही मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की सूची में देख रहे हैं। अगर, किसी का नाम 22 साल पुरानी इस मतदाता सूची में नहीं मिलेगा तो लोग 11 दस्तावेजों की मदद से वोटर लिस्ट में रह सकेंगे। प्री एसआईआर इसलिए कराया जा रहा है, ताकि झारखंड में जब एसआईआर शुरू हो तो किसी को कोई दिक्कत नहीं हो।
बताया जा रहा है कि मैपिंग का काम पूरा होने के बाद झारखंड में एसआईआर कराया जाएगा। मैपिंग भी केंद्रीय निर्वाचन आयोग के ही निर्देश पर कराई जा रही है। मैपिंग एसआईआर की तैयारी को लेकर ही कराई जा रही है।
गौरतलब है कि एसआईआर को लेकर लोगों में काफी कंफ्यूजन घर कर गया है। लोग परेशान हैं कि एसआईआर कैसे होगा। उन्हें क्या करना होगा। वह साल 2003 की मतदाता सूची कहां से पाएंगे। मगर, अभी जिला निर्वाचन विभाग की मानें तो लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। बीएलओ खुद ही उनकी मैपिंग कर रहे हैं। बीएलओ को जो सॉफ्टवेयर मिला है उसी के जरिए यह मैपिंग की जा रही है। इस सॉफ्टवेयर में निर्वाचन आयोग ने साल 2003 की मतदाता सूची अपलोड कर दी है। इसी के जरिए मैपिंग का काम कराया जा रहा है।
अगर कोई वोटर पहले जिला या झारखंड से बाहर रहता था तो उसके पिता के नाम के जरिए वहां की 2003 की मतदाता सूची से मैपिंग होगी। पिता के नाम से बच्चों की हो जाएगी मैपिंग मैपिंग में यह देखा जा रहा है कि वोटर का नाम साल 2003 की वोटर लिस्ट में था या नहीं। अगर किसी व्यक्ति का नाम साल 2003 की मतदाता सूची में है तो उसके बेटों की भी मैपिंग हो जाएगी। इसे पैतृक मैपिंग का नाम दिया गया है। मसलन, अगर किसी का नाम साल 2003 की मतदाता सूची में था। अगर इस व्यक्ति के बच्चों का नाम वोटर लिस्ट में है तो उनका नाम साल 2003 की सूची में होना जरूरी नहीं है। व्यक्ति के नाम से ही उनके बच्चों की भी मैपिंग हो जाएगी।
पूर्वी सिंहभूम में लगाए गए हैं 1922 बीएलओ
पूर्वी सिंहभूम में भी मैपिंग का काम चल रहा है। यहां इस काम के लिए 1922 बीएलओ लगाए गए हैं। मैपिंग का काम जिला उप निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में चल रहा है। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने इस काम में बीएलओ की मदद करने की जनता से अपील की थी। लोगों को बताया गया था कि वह अपने नाम को लेकर संबंधित बीएलओ से मिल कर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
तो मदद करेंगे यह 11 दस्तावेज
जिला निर्वाचन विभाग का कहना है कि अगर किसी का नाम साल 2003 की मतदाता सूची में नहीं होगा तो उसे 11 दस्तावेज में से कोई एक दिखाना होगा।
– जन्म प्रमाणपत्र
– पासपोर्ट
-जमीन या भवन के कागजात
-भारत सरकार द्वारा जारी आईडी
-पेंशनर्स पेमेंट ऑर्डर
-शैक्षिक प्रमाणपत्र-स्थायी निवास प्रमाणपत्र
-वनाधिकार प्रमाणपत्र
-जाति प्रमाणपत्र
– नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन
-परिवार रजिस्टर
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