चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले टोटों प्रखंड के नीमडीह गांव में हाथियों के आतंक को लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग का पुतला दहन किया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथी कई दिनों से घरों को तोड़ रहा है। जान-माल का खतरा बना हुआ है। लेकिन, वन विभाग के लोग नहीं आ रहे हैं। आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मिरन मुंडा ने कहा कि बहुत दुःख होता है कि सबसे बुद्धिमान और शांत जानवर हाथी आज इतना आक्रामक होता जा रहा है।
इसका मूल कारण है, कम्पनियों के लिए जंगल और पहाड़ में व्यवसायिक गतिविधियां। अवैध तरीके से पेड़ों को काटना। ये सब वन विभाग के पदाधिकारियों की लापरवाही बरतने के कारण हो रहा है। आज अगर 22 लोगों की जान गई है तो इसके लिए वन विभाग ही दोषी है। समय रहते गंभीरता से काम करते तो इतने लोगों की जान नहीं जाती।
वन विभाग हमेशा से जंगल में बसे आदिवासियों को छोटे-छोटे मामलों में परेशान करते हैं। लेकिन, आज अगर गांव के लोग अपनी जान माल की सुरक्षा स्वयं नहीं करते तो न जाने कितने लोग मारे जाते। वन कर्मी किस लिए वेतन उठा रहे हैं। वन विभाग अगर जल्द से जल्द हाथियों को उनके सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचा देते हैं तो जिले में चक्का जाम किया जाएगा।
झारखंड सरकार जल, जंगल और जमीन की बात करती है। लेकिन, आज झारखंड में कुछ नहीं बच रहा है। जेएमएम की सरकार पूंजीपतियों की सरकार बन चुकी है। ओडिशा में मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए दिया जाता है। जबकि, झारखंड सरकार मात्र 4 लाख रुपए देती है। इसलिए हमारी पार्टी मांग करती है कि मृतक के परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना चाहिए। साथ ही घर बनाने के लिए 10 लाख रुपए दिया जाए।
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