रांची : झारखंड में मनरेगा से जुड़े रोजगार सेवक और कंप्यूटर ऑपरेटर 12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिससे योजनाओं के संचालन पर असर पड़ा है। हालांकि राज्य सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था लागू की है और योजनाओं का संचालन अधिकारियों के जिम्मे किया गया है।
ग्रामीण विकास विभाग का स्पष्ट निर्देश है कि हड़ताल के बावजूद मजदूरों को काम और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि वे किसी भी स्थिति में रोजगार सृजन की गति धीमी न होने दें। प्रखंड स्तर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी (BPO) को पूरी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे कार्य आवंटन, निगरानी और प्रगति की समीक्षा कर रहे हैं। वहीं, तकनीकी कार्यों के लिए सहायक अभियंता और कनीय अभियंता को लगाया गया है, जो योजनाओं के क्रियान्वयन को सुनिश्चित कर रहे हैं।
पंचायत स्तर पर रोजगार सेवक और कंप्यूटर ऑपरेटर की अनुपस्थिति को देखते हुए मुखिया और पंचायत सचिव को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें मस्टर रोल संधारण, एफटीओ जनरेशन और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है। सरकार ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से मॉनिटरिंग करें और जहां जरूरत हो वहां अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती करें, ताकि जमीनी स्तर पर काम प्रभावित न हो। अप्रैल माह में 1.30 करोड़ मानव दिवस सृजन करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन स्थिति यह है कि हर दिन 40 हजार से 45000 मानव दिवस का ही सृजन हो पा रहा है। जबकि इस मौसम में रोजगार सृजन चार लाख से 5 लाख मानव दिवस का रहता था।
रोजगार बढ़ाने पर सरकार का जोर
ग्रामीण विकास विभाग ने जिलों को अधिक से अधिक योजनाएं शुरू कर मानव दिवस सृजन बढ़ाने का निर्देश दिया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा मजदूरों को रोजगार मिल सके। गौरतलब है कि रोजगार सेवक और कंप्यूटर ऑपरेटर सेवा नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। सरकार ने साफ किया है कि मांगों पर विचार अपनी जगह है, लेकिन योजनाओं का संचालन और मजदूरों के हित किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

