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Oral Health : स्वस्थ मुंह- स्वस्थ जीवन : ओरल हेल्थ क्यों ज़रूरी है, बता रहे हैं टाटा मेन हास्पिटल के विशेषज्ञ चिकित्सक

Oral Health : मसूढ़ों की बीमारी, जिसे पेरियोडेंटाइटिस कहा जाता है, वयस्कों में दांतों के टूटने का एक प्रमुख कारण है और बढ़ती उम्र की लगभग 60% आबादी को प्रभावित करती है।

by Birendra Ojha
Doctor explaining importance of oral health and dental hygiene
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जमशेदपुर : हर वर्ष 20 मार्च को मनाया जाने वाला वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे का उद्देश्य मुंह के स्वास्थ्य के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, मुंह से जुड़ी बीमारियों की संख्या को कम करना और सभी के लिए बेहतर मुख-स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर यह याद रखना जरूरी है कि ओरल हेल्थ केवल एक सुंदर मुस्कान तक सीमित नहीं है। मुंह शरीर का प्रवेशद्वार है और इसका स्वास्थ्य हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य से गहराई से जुड़ा होता है।

दांतों में सड़न (कैविटी), मसूढ़ों की बीमारियां और मुंह में संक्रमण जैसी समस्याएं दुनियाभर में सबसे आम स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। हालांकि ये समस्याएं केवल मुंह तक सीमित लगती हैं, लेकिन इनके प्रभाव अक्सर इससे कहीं अधिक व्यापक होते हैं। वैज्ञानिक प्रमाण स्पष्ट रूप से बताते हैं कि खराब मुख-स्वास्थ्य का संबंध मधुमेह, हृदय रोग, श्वसन संक्रमण और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं जैसी गंभीर शारीरिक स्थितियों से गहराई से जुड़ा होता है।

मसूढ़ों की बीमारी, जिसे पेरियोडेंटाइटिस कहा जाता है, वयस्कों में दांतों के टूटने का एक प्रमुख कारण है और बढ़ती उम्र की लगभग 60% आबादी को प्रभावित करती है। मसूढ़ों की बीमारी से जुड़े बैक्टीरिया और सूजन रक्तप्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे मधुमेह के मरीजों में ब्लड शुगर नियंत्रण और खराब हो सकता है तथा हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसी प्रकार, अनुपचारित दंत संक्रमण लंबे समय तक दर्द, खाने में कठिनाई, कुपोषण और जीवन की गुणवत्ता में गंभीर गिरावट का कारण बन सकते हैं।

खराब मुख-स्वास्थ्य सभी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित करता है। बच्चों में यह उनकी वृद्धि, बोलने के विकास और पढ़ाई में प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है। वयस्कों में दांतों की समस्याएं कार्यस्थल पर अनुपस्थिति और उत्पादकता में कमी का कारण बन सकती हैं। वृद्ध लोगों में दांतों का गिरना पोषण और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता और भी कम हो जाती है।

अच्छी बात यह है कि मुंह से संबंधित अधिकांश बीमारियां रोकी जा सकती हैं। दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करना, नियमित रूप से फ्लॉस करना, मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों का सीमित सेवन, तंबाकू से परहेज और नियमित रूप से दंत चिकित्सक के पास जाना— ये सरल लेकिन प्रभावी उपाय मुंह की स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं। दांतों की नियमित जांच के माध्यम से शुरुआती अवस्था में ही समस्याओं का पता चल जाता है, जिससे समय पर उपचार संभव होता है और स्थिति गंभीर होने से बच जाती है।

मुंह के स्वास्थ्य की कभी भी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए; यह समग्र स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे नियमित स्वास्थ्य देखभाल में शामिल किया जाना आवश्यक है। टाटा मेन हॉस्पिटल में हम अत्याधुनिक दंत सुविधाएं प्रदान करते हैं, जो नवीनतम डायग्नोस्टिक और उपचार तकनीकों से सुसज्जित हैं। हमारा डेंटल विभाग अन्य चिकित्सा विशेषज्ञताओं के साथ मिलकर काम करता है, जिससे क्रॉस-कंसल्टेशन एक अपवाद नहीं बल्कि नियमित प्रक्रिया बन गई है।

हमारे यहां बच्चों के लिए विशेष रूप से समर्पित एक प्रिवेंटिव डेंटल क्लिनिक भी है। प्रिवेंटिव डेंटल केयर में न्यूनतम हस्तक्षेप वाली दंत चिकित्सा, पिट और फिशर सीलेंट्स, टॉपिकल फ्लोराइड का उपयोग तथा गलत आदतों को छुड़ाने वाले उपकरण शामिल हैं। ये उपाय बचपन से ही मुंह की स्वच्छता से जुड़ी अच्छी आदतों को बढ़ावा देते हैं और लंबे समय तक मौखिक एवं समग्र स्वास्थ्य बेहतर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस वर्ल्ड ओरल हेल्थ डे पर आइए हम मुंह के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का संकल्प लें— सिर्फ एक आत्मविश्वास भरी मुस्कान के लिए नहीं, बल्कि एक स्वस्थ शरीर और बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए भी। आखिरकार, एक स्वस्थ मुंह वास्तव में एक स्वस्थ जीवन का प्रतिबिंब होता है।

-डॉ. रामा शंकर, सीनियर कंसल्टेंट एवं एचओडी (डेंटल) मेडिकल सपोर्ट सर्विसेज, टाटा मेन हॉस्पिटल

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