Jamshedpur : झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (जेएसईआरसी) ने टाटा पावर कंपनी लिमिटेड (टीपीसीएल) को बड़ा झटका देते हुए उसके अतिरिक्त पूंजी निवेश प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। कंपनी ने शहर स्थित अपने पुराने थर्मल पावर प्लांट में करीब 133.89 करोड़ रुपये निवेश की अनुमति मांगी थी, जिसे आयोग ने अस्वीकार कर दिया।
तकनीकी स्थिति का आकलन जरूरी
कंपनी ने यूनिट-2 और यूनिट-3 के नवीनीकरण और विस्तार के लिए यह निवेश प्रस्ताव दिया था। लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि कंपनी ‘रेजिडुअल लाइफ असेसमेंट’ (आरएलए) रिपोर्ट पेश करने में विफल रही। यह रिपोर्ट किसी भी पुराने पावर प्लांट की शेष आयु और उसकी तकनीकी स्थिति का आकलन करने के लिए जरूरी होती है।
25 साल पुरानी हैं यूनिटें
आयोग के अनुसार, कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट की मानक आयु 25 वर्ष होती है। टाटा पावर की दोनों 120-120 मेगावाट क्षमता वाली इकाइयां इस अवधि को पार कर चुकी हैं। ऐसे में बिना तकनीकी जांच के इतने बड़े निवेश को मंजूरी देना उचित नहीं माना गया।
उपभोक्ताओं से वसूल नहीं पाएगी खर्च
आयोग ने साफ कहा कि आरएलए रिपोर्ट के अभाव में इस निवेश को बिजली दरों में शामिल नहीं किया जा सकता। इसका मतलब है कि कंपनी इस खर्च को उपभोक्ताओं से वसूल नहीं पाएगी।
कुशलता बढ़ाने का निर्देश
आयोग ने संयंत्र की आंतरिक खपत को लेकर भी कंपनी के दावों में कटौती की है। फ्यूल गैस डी-सल्फराइजेशन (एफजीडी) के आधार पर कंपनी ने 11 प्रतिशत खपत का दावा किया था, जिसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे कंपनी पर दबाव बढ़ेगा कि वह अपनी संचालन दक्षता में सुधार करे।
आयोग के इस फैसले से साफ संकेत मिला है कि पुराने संयंत्रों में निवेश के लिए तकनीकी मानकों का पालन अनिवार्य होगा और उपभोक्ताओं के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा।

