चाईबासा : किसी भी कुप्रथा के बारे में शुरू से जागरूक किया जाए तो नतीजे बेहतर हो सकते हैं। स्कूली बच्चे जागरूक होंगे तो अगली पीढ़ी अपने विवेक का परिचय दे सकेगी। कुछ इसी तरह के उद्देश्य के साथ पश्चिमी सिंहभूम के जिला मुख्यालय में स्कूली बच्चों के बीच डायन कुप्रथा के बारे में बताने व जागरूक करने के लिए एक निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार चाईबासा के प्रधान जिला एवम सत्र न्यायाधीश सह प्राधिकार के अध्यक्ष मोहम्मद शाकिर एवम सचिव रवि चौधरी के तत्वाधान में शनिवार को यह कार्यक्रम किया गया।
छात्राओं ने दिया जागरूक होने का परिचय
मुख्यमंत्री उत्कृष्ट स्कॉट उच्च विद्यालय चाईबासा में लीगल लिटरेसी क्लब के तहत् दूसरे शनिवार को “डायन प्रथा” के बारे में अधिकार मित्र द्वारा निबंध प्रतियोगिता में शामिल होकर छात्राओं ने इस कुप्रथा के प्रति जागरूक होने का परिचय दिया। प्रतियोगिता में दसवीं, 11वीं व 12वीं कक्षा की छात्राओं ने अधिक संख्या में भाग लिया। प्रतियोगिता का उद्देश्य के माध्यम से छात्राओं द्वारा अपने गांव एवम शहरी क्षेत्रों में जागरूकता पैदा करना था।
किसी को डायन कहना एक अपराध
इस दौरान अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर ने छात्राओं को बताया कि किसी महिला को डायन कह कर संबोधन करने मात्र से यह अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में किसी महिला के साथ डायन बताकर उसके साथ उत्पीड़न करना या उसके मूल अधिकार का हनन करना भी अपराध है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चो को जागरूकता, सामान्य ज्ञान एवं सामाजिक समझ को बढ़ाना था। सभी छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचारों को रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्राचार्य अनिता सवाइयां, शिक्षक शिक्षिका एवम अधिकार मित्र सूरज कुमार ठाकुर एवम हेमराज निषाद शामिल थे।

