
कोडरमा : कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड अंतर्गत भखरा गांव में शुक्रवार की रात हाथियों के एक झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि एक ग्रामीण को बुरी तरह कुचलकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीण रतजगा करने को मजबूर हैं।
खिड़की तोड़कर निकाला राशन, ग्रामीण को बनाया निशाना
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, हाथियों का झुंड देर रात भखरा गांव में दाखिल हुआ। सबसे पहले हाथियों ने यूपीएस स्कूल, भखरा को निशाना बनाया। गजराज ने स्कूल के दरवाजों और खिड़कियों को मलबे में तब्दील कर दिया और वहां मध्याह्न भोजन (MDM) के लिए रखे चार बोरी चावल को चट कर गए। इसी दौरान गांव के पृथ्वी राम (35), पिता- शिबू राम, हाथियों की चपेट में आ गए। हाथी ने उन्हें पटक कर कुचल दिया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।
परिजनों और ग्रामीणों के सहयोग से उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सतगावां ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए कोडरमा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। हालांकि, चोट की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रांची रिम्स (RIMS) रेफर कर दिया है, जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
कोडरमा में थम नहीं रहा हाथियों का आतंक
कोडरमा जिला पिछले कुछ महीनों से हाथियों और मानव द्वंद्व का केंद्र बना हुआ है। यह पहली बार नहीं है जब हाथियों ने जान-माल का नुकसान किया है। इससे पूर्व भी डोमचांच, जयनगर और मरकच्चो प्रखंडों के सीमावर्ती गांवों में हाथियों ने कई घरों को ध्वस्त किया है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। पिछले वर्ष भी हाथियों के हमले में जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में मौत की घटनाएं सामने आई थीं। सतगावां का यह इलाका घने जंगलों से सटा होने के कारण हाथियों के लिए ‘सॉफ्ट टारगेट’ बनता जा रहा है।
प्रशासन से सुरक्षा की गुहार
घटना के बाद भखरा गांव समेत आसपास के गांवों में मातम और डर का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को सूचना दिए जाने के बावजूद हाथियों को खदेड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से अविलंब प्रभावित परिवार को मुआवजा देने और हाथियों के झुंड को रिहायशी इलाकों से दूर भगाने के लिए ट्रेंकुलाइज करने या हाथियों के कॉरिडोर की निगरानी करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

