धनबाद : झारखंड के धनबाद शहर में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर की मूर्ति स्थापित की गई है। इसका अनावरण शुक्रवार को बीसीसीएल (भारत कोकिंग कोल लिमिटेड) के सीएमडी ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मूर्ति जीवन साहित्य, शिक्षा और मानवता का प्रतीक है। कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर का दर्शन हमें कर्म के साथ करुणा का मार्ग दिखाता है। बीसीएल इस प्रेरणा को अपने कर्मियों और समाज तक पहुंचाना चाहता है। यही इस प्रतिमा का उद्देश्य है।
बीसीएल के कल्याण भवन में गुरुदेव की मूर्ति पर सीएमडी और निदेशक मंडल ने संयुक्त रूप से पुष्प अर्पित किया। कार्यक्रम में निदेशकों ने गुरुदेव के विचारों को स्मरण करते हुए कहा कि उनके आदर्श कार्यस्थल पर मानवीय दृष्टिकोण और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेंगे। इस मौके पर दीक्षा महिला मंडल की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के साथ ही सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न श्रम संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति के सौजन्य से रवींद्र संगीत की प्रस्तुति और गुरुदेव की प्रसिद्ध कविताओं का पाठ भी किया गया।
बीसीसीएल के निदेशक (कार्मिक एवं मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया ने कहा कि गुरुदेव का जीवन और दर्शन कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बीसीएल कर्मियों के कल्याण और सांस्कृतिक विकास के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं। रमैया ने कहा कि टैगोर की शिक्षाएं कार्यस्थल पर मानवीय दृष्टिकोण बढ़ाने में मदद करेंगी। उन्होंने श्रमिक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
निदेशक (तकनीकी) संजय कुमार सिंह ने कहा कि गुरुदेव ने हमेशा ज्ञान, संस्कार और रचनात्मकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बीसीएल तकनीकी उन्नति के साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी साथ लेकर चल रहा है। सिंह ने कहा कि ऐसी प्रतिमाएं नई पीढ़ी को प्रेरणा देंगी। उन्होंने कंपनी की प्रगति में सामूहिक योगदान की बात कही। श्रम संगठनों के नेताओं ने भी गुरुदेव के आदर्शों पर चलने का संकल्प दोहराया और कहा कि बीसीसीएल की यह पहल कर्मचारियों में नई ऊर्जा भरेगी।
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