
धालभूमगढ़ : धालभूमगढ़ के खरबंदा में मंगलवार को मनसा पूजा और झापान मेले में आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला। कहीं गले में फन फैलाए नाग लिपटे नजर आए तो कहीं पालकी पर सवार झापान और चारों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दी। करीब 350 वर्षों से चली आ रही इस पारंपरिक पूजा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
परंपरा के अनुसार, करीब एक महीने पहले विभिन्न जंगलों से पकड़े गए विषधर सांपों को सुरक्षित रखा गया। मंगलवार को मनसा मंगल के गायन के बाद झापान की परंपरा निभाई गई। झापान में शामिल लोगों ने कोबरा सांपों को गले में धारण कर मां मनसा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।
इसके बाद झापान पालकी पर सवार होकर दिघी बांध पहुंचा, जहां सांपों को स्नान कराया गया और पूजा-अर्चना की गई। इस अनोखे आयोजन को देखने के लिए दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
मनसा पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार दास ने बताया कि खरबंदा-मोहलीशोल में यह पूजा गांव बसने के समय से होती आ रही है। मान्यता है कि धालभूम के राजा के समय से यह परंपरा चली आ रही है। करीब 350 वर्षों से ग्रामीण इसे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रहे हैं। पूजा के दौरान रोजगार के लिए बाहर रहने वाले ग्रामीण भी अपने गांव लौटते हैं और तीन दिनों तक पूरा गांव भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है।
रात में मनसा मंगल का गायन भी हुआ। इस मौके पर विधायक सोमेश चंद्र सोरेन पहुंचे और आयोजन को आस्था की अद्भुत मिसाल बताया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि दिवंगत रामदास सोरेन द्वारा किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने मनसा मेला मंच के अधूरे कार्यों और सड़क की मरम्मत कराने की बात भी कही।
आयोजन समिति के अनुसार, तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन 20 अगस्त को घट विसर्जन के साथ होगा। इस दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।


