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नई तकनीकों को सीखने वाले युवा ही भविष्य का नेतृत्व करेंगे : राज्यपाल संतोष गंगवार

by Nikhil Kumar
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रांची : राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि आने वाला समय उन्हीं युवाओं का होगा, जो नई तकनीकों को सीखने, अपनाने और नवाचार करने की क्षमता रखते हों। उन्होंने कहा कि स्वचालन (ऑटोमेशन), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स और स्मार्ट प्रणालियों जैसी आधुनिक तकनीकें उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और दैनिक जीवन के हर क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही हैं। इसलिए युवाओं को उद्योगोन्मुख तकनीकी कौशल से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

राज्यपाल बुधवार को सिल्ली पॉलीटेक्निक में आयोजित “उद्योगोन्मुख स्वचालन एवं आईओटी प्रणालियों पर राष्ट्रीय प्रायोगिक कार्यशाला (आईएओटी-26)” के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब विद्यार्थियों को प्रयोग, नवाचार और व्यवहारिक प्रशिक्षण के माध्यम से सीखने का अवसर मिले।

उन्होंने हाल ही में आयोजित कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के पास एआई और नई तकनीकों के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की क्षमता है। राज्यपाल ने कहा कि झारखंड युवा शक्ति से परिपूर्ण राज्य है और यहां प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन, आधुनिक तकनीकी शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराने की है।

राज्यपाल ने कहा कि यदि विद्यार्थी तकनीक आधारित कौशल में दक्ष बनते हैं, तो वे केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले भी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और कौशल भारत जैसे अभियानों के जरिए तकनीक और नवाचार आधारित विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी कौशल आधारित और व्यवहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया गया है।

उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करें। साथ ही शिक्षकों और शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, रचनात्मकता और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपेक्षा की।

राज्यपाल ने उम्मीद जताई कि यह राष्ट्रीय कार्यशाला विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी साबित होगी तथा इससे तकनीकी शिक्षा को नई दिशा मिलने के साथ उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

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