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Sabrimala Temple Gold Theft : सबरीमाला मंदिर से सोना हुआ था चोरी, जमशेदपुर की राष्ट्रीय धातु कर्म प्रयोगशाला की जांच में हुई पुष्टि

Sabrimala Temple Gold Theft : गर्भगृह के दरवाजों से सोना हटाने के मिले वैज्ञानिक सुबूत

by Anurag Ranjan
Sabarimala Temple Gold Theft
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Jamshedpur : केरल के विश्व प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के गर्भगृह से जुड़े बहुचर्चित स्वर्ण चोरी मामले में बड़ा वैज्ञानिक खुलासा हुआ है। जमशेदपुर स्थित राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि मंदिर के गर्भगृह के दरवाजों से सोने की परत को अवैध रूप से हटाया गया था।

सूत्रों के अनुसार, एनएमएल की विशेषज्ञ टीम ने मंदिर परिसर से लिए गए 30 से अधिक नमूनों के पहले बैच की अत्याधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों से जांच की। जांच रिपोर्ट को कोल्लम विजिलेंस कोर्ट और विशेष जांच दल (एसआईटी) को सौंप दिया गया है। रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों ने अब तक संदेह के घेरे में रहे इस मामले को ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान कर दिया है।

सबूत के दूसरे बैच की रिपोर्ट आना है बाकी

बताया जा रहा है कि प्रयोगशाला में भेजे गए नमूनों के दूसरे बैच की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि दूसरी रिपोर्ट मिलने के बाद चोरी की पूरी प्रक्रिया, समयावधि और तरीके को लेकर और अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।

एनएमएल की रिपोर्ट अत्यंत तकनीकी और वैज्ञानिक शब्दावली पर आधारित है। ऐसे में एसआईटी रिपोर्ट के निष्कर्षों को समझने और सरल भाषा में व्याख्यायित करने के लिए धातुकर्म विशेषज्ञों की सहायता लेने की तैयारी कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि दरवाजों से कितनी मात्रा में सोना हटाया गया और क्या सोने के नीचे मौजूद तांबे की मूल संरचना के साथ भी किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई थी।

केरल हाई कोर्ट को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट

जांच पूरी होने के बाद एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट केरल हाईकोर्ट को सौंपेगी, जिसमें कथित चोरी की पूरी कार्यप्रणाली और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का उल्लेख होगा। माना जा रहा है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर अभियोजन पक्ष का मामला और मजबूत होगा।

पिछले साल सामने आया था चोरी का यह बड़ा मामला

गौरतलब है कि वर्ष 2025 में मंदिर के गर्भगृह के दरवाजों और द्वारपाल प्रतिमाओं के जीर्णोद्धार एवं सफाई कार्य के दौरान सोने की कथित चोरी का मामला सामने आया था। यह वही स्वर्ण परत थी, जिसे वर्ष 1998 में उद्योगपति विजय माल्या ने मंदिर को दान स्वरूप प्रदान किया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केरल हाईकोर्ट के निर्देश पर विशेष जांच दल का गठन किया गया था। जांच के दौरान त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के कुछ पूर्व अधिकारियों, मुख्य पुजारी तथा कई कारोबारियों की कथित संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद कई आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

एनएमएल की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी है निगाहें

अब सभी की निगाहें एनएमएल की दूसरी फॉरेंसिक रिपोर्ट और एसआईटी की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस बहुचर्चित स्वर्ण चोरी मामले में कई नए खुलासे कर सकती है।

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