Ranchi: झारखंड में राज्यसभा चुनाव (Jharkhand Rajyasabha Election) दूसरी सीट पर बढ़ी सियासी खींचतान, माले ने दावा पेश कर तैयार किया नया समीकरणकी अधिसूचना जारी होने से पहले महागठबंधन के भीतर दूसरी सीट को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अब तक यह माना जा रहा था कि राज्यसभा की एक सीट झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी, लेकिन भाकपा-माले ने अपनी दावेदारी पेश कर सियासी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है।
वामदल के खाते में जा सकती है एक सीट
माना जा रहा है कि दूसरी सीट वामदलों के खाते में जाएगी। इधर जो इशारे मिल रहे हैं उससे साफ है कि सीएम हेमंत सोरेन भी इस पक्ष में हैं कि राज्यसभा की एक सीट भाकपा माले को दी जाए। कुछ दिन पहले कांग्रेस ने राज्य सभा की दूसरी सीट पर दावा पेश करते हुए सीएम से बात की थी। इस पर सीएम ने कांग्रेस को दो टूक जवाब दिया था कि सरकार में गठबंधन के अन्य दल भी शामिल हैं। इस चुनाव में जो भी समीकरण बनाए जाएंगे उसमें उनकी अनदेखी करना ठीक नहीं होगा।
चुनाव में मजबूत है महागठबंधन की स्थिति
विधानसभा में संख्या बल के आधार पर महागठबंधन दोनों सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है। ऐसे में उम्मीदवारों के चयन को लेकर गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच सक्रियता बढ़ गई है। झामुमो जहां पहली सीट पर अपना दावा मजबूत मान रहा है, वहीं दूसरी सीट को लेकर कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिख रही है।
पूर्व विधायक विनोद सिंह को राज्य सभा भेजने की तैयारी
भाकपा-माले ने दूसरी सीट के लिए अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक विनोद सिंह का नाम आगे बढ़ाया है। पार्टी का तर्क है कि उसने राज्य में जनआंदोलनों और चुनावी संघर्षों में महागठबंधन के साथ मजबूती से भूमिका निभाई है, इसलिए उसे राज्यसभा (Jharkhand Rajyasabha Election) में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। माले के प्रदेश सचिव मनोज भक्त ने कहा कि महागठबंधन को सहयोगी दलों की राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एक सीट पर झामुमो अपना उम्मीदवार उतारे, जबकि दूसरी सीट सहयोगी दल के तौर पर भाकपा-माले को दी जाए।
कांग्रेस भी जिद पर अड़ी
हालांकि, कांग्रेस दूसरी सीट पर अपना दावा छोड़ने के पक्ष में नहीं दिख रही है। वहीं झामुमो भी अंतिम निर्णय से पहले सभी सहयोगी दलों से चर्चा कर सहमति बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना से पहले महागठबंधन के शीर्ष नेतृत्व को सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला लेना होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड की दूसरी राज्यसभा सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।
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