चाईबासा : सेल की मेघाहातुबुरु लौह अयस्क खदान में शनिवार को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की 9वीं बटालियन, पटना द्वारा आपदा प्रबंधन को लेकर व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य प्राकृतिक और औद्योगिक आपदाओं के दौरान विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों तथा आपसी समन्वय का परीक्षण करना था।
लैंड स्लाइड की बनाई गई काल्पनिक स्थिति
अभ्यास के दौरान खदान में लैंड स्लाइड होने और पांच श्रमिकों के मलबे में फंसने की काल्पनिक स्थिति बनाई गई। सूचना मिलने पर सबसे पहले सेल और सीआईएसएफ की टीम ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया। स्थिति गंभीर होने पर एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभाला। जवानों ने आधुनिक तकनीकों और विशेष रेस्क्यू उपकरणों का उपयोग कर अभियान चलाया।
100 फीट गहरी खाई से सफल रेस्क्यू
मॉक ड्रिल का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा लगभग 100 फीट गहरी खाई में फंसे घायल श्रमिक को सुरक्षित बाहर निकालना था। एनडीआरएफ के जवानों ने विशेष रोप सिस्टम, हार्नेस और स्ट्रेचर की मदद से सफलतापूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा किया। टीम ने घायल को प्राथमिक उपचार देकर मेडिकल टीम को सौंपा।
कई विभागों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में एनडीआरएफ के उप समादेष्टा विनय कुमार, सीआईएसएफ के उप समादेष्टा इंगले मयूर दादाराव, सेल किरीबुरू के महाप्रबंधक राम सिंह, मेघाहातुबुरु खदान के प्रभारी महाप्रबंधक संजय कुमार सिंह मौजूद रहे। इसके अलावा सीआरपीएफ, वन विभाग, पुलिस, सुरक्षा विभाग और मेडिकल टीम के अधिकारी एवं कर्मी भी शामिल हुए।
समन्वय पर दिया जोर
अधिकारियों ने कहा कि किसी भी बड़ी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। यह मॉक ड्रिल भविष्य की संभावित आपदाओं से निपटने की दिशा में महत्वपूर्ण तैयारी साबित हुई। इससे खदान में कार्यरत कर्मियों की सुरक्षा और बढ़ेगी।

