चाईबासा/रांची : रांची के मोराबादी स्थित ऑड्रे हाउस में शनिवार को दो दिवसीय भव्य कार्यक्रम ‘आदि वार्ता’ का उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। ‘लोकतंत्र 19’ और ‘टीम धूमकुड़िया’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के आदिवासी बुद्धिजीवी, साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता जुटे हैं। कार्यक्रम में आदिवासी समुदाय के मुद्दों, समृद्ध संस्कृति और साहित्य पर गहन विचार विमर्श किया जा रहा है।
चक्रधरपुर के युवा साहित्यकार ने की शिरकत
आयोजन में चक्रधरपुर के उभरते युवा साहित्यकार रबिन्द्र गिलुवा ने भी भागीदारी दर्ज कराई। उनके साथ रिसर्च असिस्टेंट अमीषा गागराई भी मौजूद रहीं। रबिन्द्र साहित्य के माध्यम से परंपराओं को बचाने और समाज को दिशा देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे समय में जब युवा आधुनिकता में अपनी जड़ों से दूर हो रहे हैं, उनकी यह पहल सराहनीय मानी जा रही है।
‘किलि’ परंपरा पर रखे विचार
कार्यक्रम के दौरान ‘आदिवासी साहित्य और कविता, मानवीय संवेदना और प्रतिरोध’ विषय पर विशेष सत्र हुआ। इसमें रबिन्द्र गिलुवा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। उन्होंने आदिवासी साहित्य में ‘किलि’ यानी गोत्र परंपरा के महत्व पर अपने शोध पर प्रकाश डाला। रबिन्द्र ने कहा कि आदिवासी साहित्य मानवीय संवेदनाओं का आईना है और यह पहचान बचाने का सशक्त माध्यम है।
वरिष्ठ साहित्यकार भी हुए शामिल
सत्र में ख्यातिप्राप्त साहित्यकार महादेव टोप्पो, कवयित्री मोनिका भूमिज और प्रियंका उरांव भी मंच पर मौजूद रहीं। सभी वक्ताओं ने आदिवासी साहित्य के वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियों और युवाओं की भूमिका पर चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को अपनी मौखिक परंपरा को लिखित साहित्य का हिस्सा बनाने के लिए आगे आना चाहिए।
युवाओं को विरासत पर गर्व करने की प्रेरणा
‘आदि वार्ता’ का यह आयोजन आदिवासी साहित्य और संस्कृति पर मंथन का मंच है। साथ ही यह युवाओं को अपनी विरासत पर गर्व करने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का सार्थक प्रयास भी है। कार्यक्रम रविवार को भी जारी रहेगा।

