रांची : एक बार फिर बड़गाई जमीन का मामला चर्चा में आ गया है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़गाई जमीन घोटाला और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अदालत से राहत नहीं मिली है। रांची स्थित विशेष पीएमएलए अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी है। अदालत के इस फैसले के बाद मामला अब नियमित ट्रायल की दिशा में आगे बढ़ेगा। यह मामला रांची के बड़गाई क्षेत्र में स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और अवैध धन शोधन के आरोपों से संबंधित है। मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है।
विशेष पीएमएलए अदालत ने सुनाया फैसला
विशेष पीएमएलए अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार ने सोमवार को मुख्यमंत्री की डिस्चार्ज याचिका पर अपना फैसला सुनाया। इससे पहले 3 जून को ईडी और बचाव पक्ष की ओर से विस्तृत बहस पूरी हो चुकी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच सामग्री के आधार पर इस स्तर पर आरोपों को समाप्त करने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता है। अदालत ने माना कि मामले में आगे विचारण के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है।
क्या थी हेमंत सोरेन की दलील
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से 5 दिसंबर 2025 को डिस्चार्ज याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में दावा किया गया था कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और जांच एजेंसी के पास ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे उन्हें सीधे तौर पर कथित अपराध से जोड़ा जा सके। बचाव पक्ष ने अदालत में यह भी तर्क दिया था कि मामला तथ्यात्मक और कानूनी रूप से कमजोर है तथा मुख्यमंत्री को आरोपमुक्त किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
ईडी ने लगाए हैं जमीन फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप
जांच एजेंसी ईडी का आरोप है कि बड़गाई क्षेत्र की जमीन से जुड़े दस्तावेजों में कथित हेरफेर किया गया और इस प्रक्रिया में अवैध लेन-देन के जरिए धन शोधन किया गया। जांच के दौरान एजेंसी ने कई स्थानों पर छापेमारी की थी और विभिन्न व्यक्तियों से पूछताछ भी की थी। ईडी ने अपनी जांच के आधार पर कई आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है। एजेंसी का दावा है कि मामले में भूमि अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ कर अवैध लाभ हासिल करने की कोशिश की गई।
अब आगे क्या होगा?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार डिस्चार्ज याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप सिद्ध हो गए हैं, बल्कि अदालत ने यह माना है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले की सुनवाई जारी रहनी चाहिए। अब ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य, दस्तावेज और गवाह पेश करेगा। वहीं बचाव पक्ष को भी अदालत के समक्ष अपनी दलीलें और साक्ष्य रखने का अवसर मिलेगा। सुनवाई के बाद अदालत अंतिम निर्णय देगी।
राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण मामला
बड़गाई जमीन घोटाला मामला झारखंड की राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। चूंकि इसमें राज्य के मुख्यमंत्री का नाम शामिल है, इसलिए यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Read Also- Jamshedpur Crime : जमशेदपुर में युवक की संदिग्ध मौत, शादी की तैयारियों के बीच गई जान

