Jamshedpur : झारखंड के एक आईएएस अधिकारी ने जमशेदपुर में अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचाई है। इस आइएएस अधिकारी ने अगर एक अहम पहल नहीं की होती तो अब तक जमशेदपुर के कई लोग अपनी जान गंवा चुके होते। अब आपके जेहन में एक सवाल कौंध रहा होगा कि वह कौन आईएएस है जिसने इस दौर में ऐसा कदम उठाया कि उसे लोग अब तक याद करते हैं। और आखिर उसने ऐसा क्या काम किया जिससे अब तक लोगों की जान बच रही है।
उस आईएएस अधिकारी का नाम है डॉक्टर अमिताभ कौशल। डॉ अमिताभ कौशल ने वह काम कर दिया जिससे जमशेदपुर को आज तक फायदा मिल रहा है। बात साल 2015 की है। उन दिनों अमिताभ कौशल पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त हुआ करते थे। दिसंबर के पहले हफ्ते में अमिताभ कौशल को एक महत्वपूर्ण मीटिंग के सिलसिले में दिल्ली जाना पड़ा। वह दिल्ली से लौटे तो नया कांसेप्ट लेकर। शाम को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि जब उनकी ट्रेन यमुना ब्रिज से गुजर रही थी तो उन्होंने जो देखा वह बेहद अहम था। इससे जमशेदपुर को भी फायदा हो सकता है।
इसके बाद अमिताभ कौशल ने जेएनएसी और टाटा स्टील यूआईएसएल (तब जुस्को) के अधिकारियों के साथ एक मीटिंग बुलाई। इस मीटिंग में उन्होंने अपने उस प्रोजेक्ट को साझा किया जो उन्होंने यमुना ब्रिज पर देखा था। सभी अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की तारीफ की। इसके बाद योजना धरातल पर उतरी। यही प्रोजेक्ट आज तक जमशेदपुर के लोगों की जान बचा रहा है।
अमिताभ कौशल जब दिल्ली से लौटे थे तो बेहद आत्मविश्वास से भरे हुए थे। उनके चेहरे पर एक खास खुशी झलक रही थी। कुछ अच्छा करने का हौसला। उन्होंने बात शुरू की थी उस मुद्दे से जो जमशेदपुर के लिए एक अभिशाप जैसा था। इस मुद्दे की चर्चा तो खूब होती थी मगर, समस्या हल कैसे होगी इस पर किसी अधिकारी ने दिमाग नहीं खपाया था। अमिताभ कौशल ने तब पत्रकारों को बताया कि जब उनकी ट्रेन यमुना ब्रिज से गुजर रही थी तो उन्होंने खिड़की से बाहर की तरफ झांका। देखा कि यमुना ब्रिज पर ऊंची ऊंची जालियां लगी हैं।
अमिताभ कौशल ने बताया था कि जालियां देखते ही उन्हें मानगो के स्वर्णरेखा नदी के पुल की याद आ गई। उनके दिमाग में वह तस्वीरें एक-एक कर आने लगीं जो वह अखबारों में देख चुके थे। मानगो पुल से युवक ने नदी में लगाई छलांग, मौत। अमिताभ कौशल के दिमाग में यह विचार तेजी से बैठता गया कि अगर मानगो पुल पर इसी तरह जाली लग जाए तो लोगों की जान बच सकती है। इसके बाद उन्होंने जुस्को को निर्देश दिया और दिसंबर 2015 में 22 लाख रुपये खर्च कर पुल पर जाली लगा दी गई।
इस जलाी के लग जाने के बाद से पुल पर ऐसी घटनाएं कम हो गई हैं। अब पुल से कोई कूदने की कोशिश करता है तो उसे जाली पर चढ़ना पड़ता है। तब तक राह चल रहे लोग उसे पकड़ लेते हैं। तब से अब तक सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
बर्मामाइंस की तमन्ना की बची जान, मानगो पुल से कूदने जा रही थीं
जमशेदपुर के बर्मामाइंस थाना क्षेत्र स्थित मुस्लिम बस्ती की रहने वाली तमन्ना परवीन ने रविवार शाम करीब छह बजे मानगो पुल पर आत्महत्या का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से निजी जीवन की परेशानियों और मानसिक तनाव से गुजर रही थी, जिसके कारण उसने यह कदम उठाने की कोशिश की। घटना के दौरान पुल से गुजर रहे स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद पत्रकारों की नजर युवती पर पड़ गई। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए लोगों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और समय रहते उसे सुरक्षित रोक लिया। इसके बाद उन्होंने युवती को समझाया, उसका मनोबल बढ़ाया और उसे शांत करने का प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही मानगो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तमन्ना परवीन को अपने संरक्षण में लिया। पुलिस ने उसके परिजनों को सूचना दी और प्रारंभिक पूछताछ तथा काउंसलिंग के बाद युवती को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया। स्थानीय लोगों की सतर्कता, मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई के कारण एक बड़ी अनहोनी टल गई। फिलहाल युवती सुरक्षित है और अपने परिजनों के साथ है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में अकेले न रहें तथा आवश्यकता पड़ने पर परिवार, मित्रों या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से मदद लें।

