रांची : टैक्स चोरी और फर्जी रजिस्ट्रेशन का मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। झारखंड में एक नंबर पर 35 हजार से अधिक वाहन दौड़ रहे हैं। मामले में अब हाई कोर्ट सख्त हो गया है। परिवहन सचिव को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने राज्य में एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर पर 35,367 वाहनों के संचालन के आरोपों को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई की।
अदालत ने परिवहन सचिव को नोटिस जारी कर 10 जुलाई तक विस्तृत जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में मिथुन कुमार की ओर से जनहित याचिका दाखिल की गई है। कहा गया है कि कर चोरी से जुड़ा यह मामला तब सामने आया जब राज्य के परिवहन विभाग ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में व्यावसायिक वाहनों के डेटा की जांच की।
जांच में पाया गया कि हजारों वाणिज्यिक वाहनों ने अवैध रूप से केवल एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल किया था, ताकि वे रोड टैक्स, बीमा और फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़े नियमों की अनदेखी कर सकें।
सरकारी आंकड़ों के आधार पर प्रार्थी ने दावा किया है कि राज्य में हजारों वाहन एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ संचालित हो रहे हैं। प्रार्थी के अनुसार इस प्रकार की अनियमितता से सड़क दुर्घटनाओं, आपराधिक घटनाओं की जांच तथा वाहन स्वामित्व की पहचान से जुड़े मामलों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
कई बसों का नियमों के विपरीत हो रहा कंवर्जन
सुनवाई के दौरान बसों के मोडिफिकेशन और उनके कथित गलत कंवर्जन का मुद्दा भी उठाया गया। अदालत को बताया गया कि टैक्स बचाने के उद्देश्य से कई बसों का नियमों के विपरीत कंवर्जन किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है और विशेष रूप से स्कूली बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। याचिका में राज्य में ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि लाइसेंस निर्गत करने से पहले आवश्यक जांच और सत्यापन की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं अपनाई जा रही है। कई मामलों में निचले स्तर पर ही औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के उपयोग का भी आरोप लगाया गया है।
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