धनबाद : कोयलांचल में अवैध कोयला खनन और चोरी का धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा। लगातार आ रही शिकायतों के बाद अब दिल्ली में बैठा कोयला मंत्रालय भी अलर्ट मोड पर आ गया है। मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) से तुरंत डिटेल रिपोर्ट तलब की है। मंत्रालय जानना चाहता है कि आखिर किन इलाकों में और किसकी शह पर यह खेल चल रहा है।
बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल खुद भी कई बार सार्वजनिक मंचों से कोयला चोरी की इस समस्या को एक बड़ी चुनौती बता चुके हैं। मंत्रालय को शिकायत मिली है कि बीसीसीएल की कुछ खास खदानों और आउटसोर्सिंग प्रोजेक्ट्स के आसपास बड़े पैमाने पर कोयले की हेराफेरी हो रही है। इस अवैध धंधे से न सिर्फ बीसीसीएल बल्कि केंद्र सरकार और देश की अर्थव्यवस्था को झटका लग रहा है।
इन मुद्दों पर मांगी जानकारी
मंत्रालय ने जो रिपोर्ट मांगी है, उसमें कंपनी को बताना होगा कि कोयला चोरी रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए, सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं, इस लापरवाही के लिए कौन-से अधिकारी जिम्मेदार हैं, भविष्य में इस लूट को रोकने के लिए कंपनी की क्या योजना है… आदि।
दूसरी तरफ, बीसीसीएल के अधिकारियों का कहना है कि वे सभी विभागों से डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। समय पर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। कंपनी का दावा है कि वह सीआईएसएफ और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर लगातार छापेमारी करती है।
500 करोड़ की सुरक्षा भी फेल, बढ़ रहा खतरा
बीसीसीएल हर साल सुरक्षा व्यवस्था और सीआईएसएफ के करीब 3,000 जवानों पर 500 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी ने ड्रोन और जीपीएस ट्रैकिंग जैसी तकनीक भी अपनाई है, लेकिन शातिर गिरोहों के आगे सब बेअसर हो रहा है। अब यह मामला सिर्फ पैसों के नुकसान का नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की जान पर बन आया है।
अवैध माइनिंग की वजह से सोनारडीह, लोयाबाद और चिरकुंडा-टाटा मुख्य मार्ग के नीचे की जमीन खोखली हो रही है, जिससे भू-धंसान का खतरा बढ़ गया है। यहां तक कि धनबाद-चंद्रपुरा रेल लाइन पर भी संकट मंडरा रहा है। केंद्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे समेत इलाके के कई सांसद-विधायक इस पर चिंता जता चुके हैं।
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