
रांची : झारखंड में बिजली उपभोक्ताओं को बिजली खरीद लागत या ईंधन मूल्य में कमी आने पर हर बार तत्काल राहत नहीं मिलेगी। झारखंड राज्य विद्युत विनियामक आयोग (जेएसईआरसी) ने वितरण टैरिफ निर्धारण नियमावली में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके लिए आयोग ने अधिसूचना जारी कर दी है।
नए नियम के अनुसार, यदि किसी वितरण कंपनी पर उसी वित्तीय वर्ष में रेगुलेटरी एसेट अथवा राजस्व अंतर की वसूली बाकी है, तो बिजली आपूर्ति की लागत में कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं को नहीं दिया जाएगा। यानी ईंधन लागत, बिजली खरीद लागत या ट्रांसमिशन शुल्क घटने के बावजूद उपभोक्ताओं की बिजली दरों में तत्काल कमी जरूरी नहीं होगी।
आयोग ने वितरण टैरिफ निर्धारण नियमावली 2025 में संशोधन करते हुए नई नियमावली 2026 की स्वीकृति दी है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि बिजली आपूर्ति की लागत में कमी से होने वाली बचत को पहले वितरण कंपनियों के बकाया रेगुलेटरी एसेट अथवा राजस्व अंतर की भरपाई में समायोजित किया जा सकेगा।
इस संशोधन को बिजली वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, क्योंकि भविष्य में बिजली खरीद लागत कम होने के बावजूद उन्हें हर स्थिति में तत्काल सस्ती बिजली का लाभ नहीं मिल सकेगा। आयोग की ओर से जारी अधिसूचना के साथ ही यह नई व्यवस्था पूरे राज्य में प्रभावी हो गई है।

