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Tata Steel Grade Revision : टाटा स्टील के ग्रेड रिवीजन से ठगे महसूस कर रहे एनएस ग्रेड के कर्मी, अन्य कर्मियों में भी असंतोष, बिगड़ सकता है माहौल

by Arvind Shrivastava
Tata Steel Grade Revision
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जमशेदपुर : टाटा स्टील के बहुप्रतीक्षित ग्रेड रिवीजन समझौते को जहां एक ओर ऐतिहासिक उपलब्धि बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस समझौते के बाद कर्मचारियों के एक बड़े वर्ग में नाराजगी और असंतोष की लहर भी दिखाई देने लगी है। खासकर एनएस ग्रेड के कर्मचारी खुद को इस समझौते में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कम वेतन वृद्धि, ग्रेड रिवीजन में अपेक्षा से कम लाभ और सीरियल भुगतान में लगातार हो रही देरी ने कर्मचारियों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। समझौते की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद यूनियन कार्यालय में जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे घटनाक्रम को एक नया मोड़ दे दिया।

बुधवार का दिन टाटा स्टील के इतिहास में वेतन समझौते के लिहाज से एक महत्वपूर्ण दिन माना गया। सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद वेज रिवीजन समझौते पर हस्ताक्षर हुए और कर्मचारियों को वेतन वृद्धि तथा भत्तों में बढ़ोतरी का लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ। लेकिन समझौते की स्याही सूखने से पहले ही यूनियन कार्यालय में सवालों का सिलसिला शुरू हो गया।

समझौते के बाद आयोजित कमेटी मीटिंग में कई सदस्यों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बैठक के दौरान कई प्रतिनिधियों ने यूनियन नेतृत्व से पूछा कि इतने बड़े समझौते की पूरी जानकारी पहले कर्मचारियों और कमेटी सदस्यों के साथ साझा क्यों नहीं की गई। सदस्यों का कहना था कि कर्मचारियों के भविष्य और आर्थिक हितों से जुड़े फैसलों में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए थी।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान माहौल काफी गर्म हो गया। कई सदस्यों ने समझौते के विभिन्न प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्मचारियों के बीच जो उम्मीदें बनी थीं, समझौता उन उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतरता दिख रहा है। कुछ सदस्यों ने यूनियन अध्यक्ष से सीधे जवाब मांगे और स्पष्ट जानकारी की मांग की।

सबसे अधिक चर्चा एनएस ग्रेड कर्मचारियों को लेकर हुई। कर्मचारियों का कहना है कि ग्रेड रिवीजन में उन्हें अपेक्षा से काफी कम इंक्रीमेंट मिला है। उनका मानना है कि जिस तरह अन्य ग्रेड के कर्मचारियों को लाभ मिला है, उसी अनुपात में एनएस ग्रेड को फायदा नहीं पहुंचा। यही वजह है कि इस वर्ग में निराशा का माहौल है।

एनएस ग्रेड कर्मचारियों की एक और बड़ी शिकायत सीरियल भुगतान को लेकर सामने आई है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से सीरियल का पैसा मिलने में देरी हो रही है। वेज रिवीजन के बाद उम्मीद थी कि लंबित भुगतान की प्रक्रिया में तेजी आएगी, लेकिन अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आने से कर्मचारियों की बेचैनी बढ़ती जा रही है।

बैठक में कई प्रतिनिधियों ने कहा कि वेज रिवीजन केवल आंकड़ों और प्रतिशत की घोषणा भर नहीं होना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ हर कर्मचारी के जीवन में दिखाई देना चाहिए। यदि किसी वर्ग को यह महसूस हो कि उसके साथ न्याय नहीं हुआ है, तो स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े होंगे।
हालांकि यूनियन नेतृत्व ने सभी आरोपों और आशंकाओं पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि समझौता कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है।

नेतृत्व का दावा है कि कई दौर की कठिन बातचीत और लंबी वार्ताओं के बाद यह समझौता संभव हो पाया है। यूनियन पदाधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि समझौते के हर बिंदु की जानकारी कर्मचारियों तक पहुंचाई जाएगी और जिन मुद्दों पर भ्रम या असंतोष है, उन पर भी चर्चा की जाएगी।
लेकिन फिलहाल तस्वीर यह है कि वेज रिवीजन के जश्न के साथ-साथ असंतोष की आवाजें भी तेज हो रही हैं।

खासकर NS ग्रेड कर्मचारियों की नाराजगी यूनियन नेतृत्व के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कर्मचारियों की शंकाओं का समाधान कैसे होता है और क्या आने वाले दिनों में यूनियन इस बढ़ते असंतोष को शांत कर पाएगी या फिर यह मुद्दा और बड़ा रूप लेगा।

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