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Jamshedpur Muharram: यौमे आशूरा को गम की चादर में लिपटा रहा जमशेदपुर, कर्बला की मंजरकशी देख रोए अज़ादार

आशूर के दिन सुबह साकची में हुसैनी मिशन के इमामबाड़े से एकमात्र जुलूस निकला। यहां मर्सिया पढ़ी गई। आज शब्बीर पर क्या आलम ए तन्हाई है।

by Mujtaba Haider Rizvi
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Jamshedpur : जमशेदपुर में यौमे आशूरा के दिन लौह नगरी गम के चादर में लिपटी रही। हर तरफ मजलिसो मातम का समां था। पैगंबर ए अकरम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम के नवासे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, उनकी औलाद और उनकी शहादत पर गम तारी रहा।

शाम को अकीदतमंद साकची और बिष्टुपुर कर्बला में जमा हुए। यहां इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को सलाम पेश कर उनकी शहादत को याद किया गया। ताजिया और अलम के फूल नदी किनारे दफनाए गए।

आशूर के दिन सुबह साकची में हुसैनी मिशन के इमामबाड़े से एकमात्र जुलूस निकला। यहां मर्सिया पढ़ी गई। आज शब्बीर पर क्या आलम ए तन्हाई है। यह जुलूस साकची गोल चक्कर तक गया और वापस आकर इमाम हुसैनी मिशन इमामबाड़ा में खत्म हुआ।

पढ़ी गई आशूरा की नमाज

इसके बाद यहां आशूर की खास नमाज पढ़ी गई।  मानगो की जाकिर नगर इमामबाड़ा में आशूरा की खास नमाज पढ़ी गई। दोपहर को बाद लगभग 4:00 बजे हुसैनी मिशन की इमामबाड़ा में जियारत ए आशूरा पढ़ी गई। इसके बाद, फाका शिकनी का प्रोग्राम हुआ।

हुई शाम ए गरीबां की मजलिस

मगरिब की नमाज के बाद हुसैनी मिशन के इमामबाड़े में शाम ए गरीबां की मजलिस हुई। इसमें इमाम हुसैन और उनके असहाब की शहादत के बाद यजीदी फौज के हुसैनी खयाम पर हमले और महिलाओं की चादर लूटे जाने का जिक्र किया गया, जिसे सुनकर लोगों की आंखें नम हो गईं। अजादार जारो कतार रोए। बाद में नौहा खानी और सीनजनी हुई। ज़ाकिर नगर की इमाम बारगाह में भी शाम ए गरीबां की मजलिस हुई। मजलिस के बाद यहां कर्बला की जंग की मंजरकशी की गई।

या अली या हुसैन

इसके अलावा, जमशेदपुर के मानगो व आजाद नगर समेत विभिन्न इलाकों के अलावा धतकीडीह, जुगसलाई और गोलमुरी में अखाड़े के जुलूस निकले। इन जुलूसों में या अली या हुसैन के नारे लगाए गए। सभी को लंगर तकसीम किया गया। अखाड़े में इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया। गोलमुरी अखाड़ा कमेटी के अध्यक्ष शाही आदिल ने कहा कि इमाम हुसैन की शहादत ने इस्लाम को जिंदा कर दिया। किसी शायर ने सच कहा है- इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।

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