
रांची : झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने बंद की जा चुकी महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लंबित सभी मजदूरी भुगतान और बिलों का निपटारा, वेतन की निकासी 10 जुलाई तक हर हाल में करने का निर्देश सभी जिलों को दिया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर भुगतान नहीं होने पर संबंधित उपविकास आयुक्त (डीडीसी) और जिम्मेदार पदाधिकारियों को उत्तरदायी मानते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस संबंध में मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय कुमार बर्णवाल ने सभी जिलों के उप विकास आयुक्तों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में लंबित भुगतानों के शीघ्र निपटारे के साथ-साथ केंद्र प्रायोजित नई योजना ‘विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी रामजी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में बताया गया कि भारत सरकार ने 30 जून 2026 तक मनरेगा के तहत किए गए सभी कार्यों का लंबित भुगतान जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। इसी के आलोक में ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों को एक सप्ताह के भीतर सभी बकाया भुगतान का निपटारा सुनिश्चित करने को कहा है।
समीक्षा के दौरान नई योजना विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के क्रियान्वयन पर भी विस्तार से चर्चा हुई। राज्य सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। योजना के तहत विशेष रूप से आदिम जनजाति (पीवीटीजी) परिवारों को अतिरिक्त 50 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इस प्रकार पात्र मजदूरों को कुल 125 कार्य दिवस का रोजगार मिलेगा और उन्हें लगभग 300 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी दी जाएगी। जिलों को इसके अनुरूप आवश्यक तैयारी और कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि फिलहाल मनरेगा मजदूरों की पूर्व में कराई गई ई-केवाईसी को मान्य माना जाएगा, ताकि लंबित भुगतान और नई योजना के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। सभी जिलों से एक सफ्ताह तक भुगतान पूरा कर अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।

