
पलामू : जिले के पड़वा प्रखंड अंतर्गत सिक्का गांव में 5 लोगों की मौत मामले में एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। मौत के पीछे की असली वजह अब साफ होती दिख रही है। स्वास्थ्य विभाग और रांची की सरकारी लैब की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि परिवार जिस सरसों तेल का इस्तेमाल खाने में कर रहा था, वह जहरीला हो चुका था। तेल की जांच में उसमें ‘आर्गेमोन’ जिसे आम भाषा में कटेली या भड़भांड कहते हैं के बीज का तेल मिला पाया गया है।
सरसों के साथ कटेली के बीज भी पिस गए
जांच टीम के मुताबिक, पीड़ित परिवार बेहद गरीब था और उन्होंने अपने ही खेत में उगाई गई सरसों से घर पर तेल निकलवाया था। बदकिस्मती से उनके खेत में सरसों के साथ-साथ कटेली नाम की जहरीली घास भी भारी मात्रा में उगी हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि फसल की कटाई या तेल पिराई के वक्त कटेली के बीज भी सरसों के साथ पिस गए, जिससे तेल जहरीला बन गया। सरकारी लैब ने इस तेल को पूरी तरह असुरक्षित और जानलेवा घोषित कर दिया है।
5 ग्राम से भी कम बचा था हीमोग्लोबिन

डॉक्टरों के अनुसार, इस जहरीले तेल को खाने की वजह से परिवार के लोगों के शरीर में खून की भारी कमी हो गई थी। हीमोग्लोबिन 5 ग्राम से भी कम बचा था। इसके साथ ही उनकी किडनी पूरी तरह खराब हो गई थी और उन्हें खून की उल्टियां और दस्त होने लगे थे। ये सभी लक्षण कटेली का जहर शरीर में फैलने की तरफ इशारा करते हैं।
सुनील ने जहरीले तेल के इस्तेमाल से किया इनकार
इस हादसे में बचे परिवार के एक सदस्य सुनील मेहता ने बताया कि वह काम के सिलसिले में घर से बाहर गए थे। तब तक घर में नया तेल नहीं पिसाया गया था। उनका कहना है कि उन्होंने इस जहरीले तेल का इस्तेमाल नहीं किया। हालांकि वह भी पिछले एक हफ्ते से बीमार हैं और उनमें भी वैसे ही लक्षण दिख रहे हैं। उनका इलाज रांची के रिम्स अस्पताल में चल रहा है।
प्रशासन की तैयारी और बचाव के उपाय
इस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने पूरे सिक्का गांव में घर के पिसे हुए सरसों तेल के इस्तेमाल और उसकी बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी है। प्रशासन से कहा गया है कि वे पूरे गांव के लोगों का हेल्थ चेकअप करवाएं ताकि अगर किसी और ने भी यह तेल खाया हो, तो वक्त रहते उसका इलाज हो सके। साथ ही, कृषि विभाग को खेतों से इस जहरीली घास को साफ करने के लिए अभियान चलाने की सलाह दी गई है।

