
रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद जरूरी और बड़ा फैसला सुनाया है जो चर्चा में है। अदालत ने स्पष्ट कहा है कि भांग को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस NDPS कानून के तहत प्रतिबंधित नहीं माना गया है। कोर्ट के मुताबिक, इस कानून में भांग रखने या इसका इस्तेमाल करने पर सजा का कोई प्रावधान नहीं है। जबकि जमशेदपुर की एक निचली अदालत ने इस मामले में आरोपी को सात साल की सजा सुनाई थी। जुर्माना भी लगाया था। हाईकोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
पहले का फैसला बदला
यह फैसला जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने सुनील सिंह नामक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मालूम हो कि जमशेदपुर की एक निचली अदालत ने 2009 में सुनील सिंह को दोषी मानते हुए 7 साल का कठोर कारावास और 50,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने इस पुरानी सजा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
मामला लगभग 26 साल पुराना है। 17 सितंबर 2000 को जमशेदपुर पुलिस ने चाईबासा बस स्टैंड से सुनील सिंह को गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन मामला चलता रहा।
गांजे और भांग में है अंतर
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एक महत्वपूर्ण बात कही। कोर्ट ने समझाया कि कानूनन भांग और गांजे में अंतर है। एनडीपीएस एक्ट के तहत गांजे को तो नशीले पदार्थों की श्रेणी में रखकर बैन किया गया है, लेकिन भांग को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है।
इसके साथ ही, कोर्ट ने पाया कि सरकारी वकील या पुलिस ऐसा कोई भी साइंटिफिक या फॉरेंसिक सबूत कोर्ट में पेश नहीं कर पाए, जिससे यह साबित हो सके कि पकड़ा गया सामान गांजा था। अदालत ने यह भी नोट किया कि झारखंड सरकार ने भी राज्य में भांग रखने या खाने पर कोई कानूनी रोक नहीं लगाई है। सबूतों की कमी और कानून के नियमों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।
Read Also: Ramgarh News: रामगढ़ पुलिस की हाईटेक पहल… अपराधियों की बनेगी ई-प्रोफाइल, होगी डिजिटल मॉनिटरिंग

