
Ranchi : झारखंड भाजपा ने प्रदेश कार्यसमिति के गठन की तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इस बार संगठन में महिलाओं और आदिवासी कार्यकर्ताओं की भागीदारी बढ़ाने पर खास जोर दिया जा रहा है। पार्टी प्रदेश कार्यसमिति में तकरीबन 33 प्रतिशत महिलाओं को स्थान देने की दिशा में काम कर रही है। हालांकि मुख्य प्रदेश कमेटी में यह अनुपात पूरी तरह लागू नहीं हो पाएगा, लेकिन कार्यसमिति, विभिन्न मोर्चों और प्रकोष्ठों में बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारियों को जिम्मेदारी दिए जाने की तैयारी है।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश संगठन को निर्देश दिया है कि महिलाओं और आदिवासी समाज के सक्रिय कार्यकर्ताओं को संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाए। इसी रणनीति के तहत महिला मोर्चा के अलावा युवा मोर्चा और ओबीसी मोर्चा में भी महिलाओं को अहम जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो झारखंड मुक्ति मोर्चा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन का लगातार बढ़ता राजनीतिक प्रभाव भी भाजपा की इस रणनीति की एक बड़ी वजह माना जा रहा है। पार्टी महिला नेतृत्व को मजबूत कर इस प्रभाव का राजनीतिक जवाब देने की तैयारी में है।
विधानसभा चुनाव में आदिवासी बहुल सीटों पर मिली हार से सबक लेते हुए भाजपा अब युवा आदिवासी कार्यकर्ताओं को संगठन की पहली पंक्ति में लाने की योजना पर काम कर रही है। पार्टी का लक्ष्य भविष्य के लिए मजबूत आदिवासी नेतृत्व तैयार करना है।
इसके साथ ही भाजपा सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय उन कार्यकर्ताओं को भी संगठन में मौका देगी, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का पक्ष प्रभावी ढंग से रखते हैं और साथ ही जमीनी स्तर पर भी सक्रिय रहते हैं।
पार्टी का मानना है कि संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से मध्यम वर्ग तक बेहतर पहुंच बनाई जा सकेगी। पिछले विधानसभा चुनाव में बोकारो, कांके, देवघर और गोड्डा जैसी शहरी सीटों पर अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद भाजपा अब महिला नेतृत्व के जरिए शहरी और मध्यम वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

