
रांची: जब अपने ही घर के दरवाजे पर ईंट-पत्थरों की दीवार खड़ी कर दी जाए और थाने से लेकर आला अफसरों तक गुहार लगाने के बाद भी कोई सुनने वाला न हो, तो इंसान सीधे सूबे के मुखिया की चौखट का रुख करता है। रांची के अशोक नगर रोड नंबर-1 में सीनियर IPS व रेल DIG आलोक प्रियदर्शी और पत्रकार सैयद शारीफ इब्राहिम के बीच रास्ते को लेकर छिड़ा विवाद अब सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दरबार तक पहुंच गया है।
शनिवार को पीड़ित पत्रकार अपने पूरे परिवार के साथ CM के पैतृक गांव नेमरा पहुंचे और मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी आपबीती सुनाई। परिवार ने CM के सामने साफ कहा कि एक बड़े पुलिस अफसर के रसूख के आगे स्थानीय पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है, इसलिए अब सिर्फ सरकार का सीधा दखल ही उन्हें अपने ही घर में ‘कैद’ होने से बचा सकता है।
नेमरा में CM से मिले, सुनाई 15 दिनों की कहानी
शनिवार को पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम अपने परिजनों के साथ नेमरा पहुंचे, जहां उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से व्यक्तिगत मुलाकात की। बातचीत के दौरान परिवार ने शुरू से लेकर अब तक घटे पूरे घटनाक्रम का कच्चा-चिट्ठा CM के सामने रख दिया। पीड़ित परिवार ने बताया कि कैसे एक आम रास्ते को बंद करने के लिए पहले सरकारी गाड़ी अड़ाई गई और फिर रात के अंधेरे में गेट के ठीक सामने ईंटों की कतार और पत्थर के भारी-भरकम बोल्डर गिरा दिए गए। परिजनों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि उनके घर का रास्ता तुरंत खुलवाया जाए, पूरे परिवार को सुरक्षा दी जाए और इस पूरे मामले की किसी स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराई जाए।
‘गेट पर गाड़ी खड़ी की, फिर रात में गिरा दिए पत्थर’
मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन में पत्रकार शरीफ ने आरोप लगाया कि उनके घर से बाहर निकलने के इकलौते रास्ते को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। पहले 29 सितंबर की शाम को DIG के इस्तेमाल वाली सरकारी स्कॉर्पियो को जानबूझकर गेट के मुहाने पर सटाकर खड़ा किया गया, ताकि कोई बाहर न निकल सके।

इसके बाद जब मामला कोर्ट-कचहरी और थाने पहुंचा, तो 3 और 4 अक्टूबर की दरमियानी रात में अंधेरे का फायदा उठाकर गेट के सामने पत्थरों और ईंटों का अंबार लगा दिया गया। परिवार का कहना है कि घर में बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे हैं, लेकिन रास्ता बंद होने से सबका आना-जाना ठप हो गया है और कोई इमरजेंसी होने पर एम्बुलेंस तक अंदर नहीं आ सकती।
स्थानीय पुलिस-प्रशासन पर चुप्पी साधने का आरोप
CM से मुलाकात के दौरान पीड़ित पत्रकार ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी के रवैये पर भी गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि घटना के तुरंत बाद अरगोड़ा थाने में लिखित शिकायत दी गई, अंचल अधिकारी और एसडीएम कोर्ट तक बात पहुंची, लेकिन जब सामने खाकी वर्दी का इतना बड़ा ओहदा हो, तो स्थानीय थानेदार और अफसर कार्रवाई करने से कतराते नजर आ रहे हैं। प्रशासन की इसी सुस्ती और बेरुखी की वजह से रास्ता खोलने के बजाय अवरोध और बढ़ा दिए गए, जिसके चलते मजबूर होकर उन्हें मुख्यमंत्री से सीधे गुहार लगाने आना पड़ा।
हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट के अगले ही दिन CM से मुलाकात
यह मुलाकात इसलिए भी बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि ठीक एक दिन पहले ही पीड़ित परिवार ने झारखंड हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दाखिल की है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में झारखंड सरकार, रांची DC, SDM, अरगोड़ा थानेदार और DIG आलोक प्रियदर्शी को पार्टी बनाते हुए गेट से फौरन अवरोध हटाने, परिवार को सुरक्षा देने और पूरे विवाद की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
अदालत का दरवाजा खटखटाने के तुरंत बाद अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तक बात पहुंचने से प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है। हालांकि, ये तमाम आरोप पीड़ित पत्रकार और उनके परिवार की ओर से लगाए गए हैं।

