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Unified Identity System : झारखंड में पहचान व्यवस्था होगी एकीकृत, आधार से लिंक करने की तैयारी तेज

सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने सभी विभागों से 10 दिनों में मांगा पहचान पत्रों का ब्योरा

by Nikhil Kumar
Unified Identity Syste
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रांची:  झारखंड सरकार ने राज्य में विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए जाने वाले पहचान पत्रों को एकीकृत करने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने सभी विभागों, बोर्डों, निगमों, प्राधिकरणों और अधीनस्थ संस्थाओं को पत्र जारी कर निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने स्तर पर जारी किए जा रहे सभी प्रकार के पहचान पत्रों का विस्तृत ब्योरा 10 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। यह कवायद भविष्य में इन पहचान पत्रों को आधार से जोड़ने की संभावनाओं के आकलन के लिए की जा रही है।

विभाग की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा देशभर में किए जा रहे आकलन के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों में संचालित अलग-अलग पहचान प्रणालियों की स्थिति का अध्ययन कर उन्हें एकीकृत करने की दिशा में आगे बढ़ना है। पत्र के अनुसार सभी विभागों को व्यक्ति, व्यवसाय और पेशे से जुड़े अपने-अपने स्तर पर जारी किए जाने वाले सभी प्रकार के पहचान पत्रों की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा संबंधित ऑनलाइन पोर्टल और डिजिटल व्यवस्था का विवरण भी साझा करना होगा।

अलग-अलग पहचान पत्र किया जा रहे हैं जारी, फर्जीवाड़ी के भी आसान का

सरकार का मानना है कि वर्तमान में अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग पहचान पत्र जारी किए जाने से एक ही व्यक्ति के कई पहचान पत्र बन जाते हैं। इससे रिकॉर्ड के दोहराव, फर्जीवाड़े की आशंका और सरकारी सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता संबंधी चुनौतियां पैदा होती हैं। आधार से जोड़ने की दिशा में यह पहल पहचान सत्यापन प्रणाली को अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
इस व्यवस्था के लागू होने पर लोगों को सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ लेने के लिए बार-बार अलग-अलग पहचान पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही डिजिटल सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और पूरी व्यवस्था अधिक पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बन सकेगी।

तैयार होगी कार्य योजना
फिलहाल सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग सभी विभागों से जानकारी एकत्र कर रहा है। इसके आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसे झारखंड में पहचान प्रणाली को आधुनिक, एकीकृत और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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