
Jamshedpur : नीदरलैंड में टाटा स्टील की इकाई टाटा स्टील आइजमुइडेन के खिलाफ कथित पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू होने जा रही है। वहां की सार्वजनिक अभियोजन सेवा ने कंपनी पर मुकदमा चलाने का फैसला किया है। हालांकि, टाटा स्टील ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अदालत में तकनीकी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।
कंपनी के अनुसार पूरा मामला कोक उत्पादन प्रक्रिया के दौरान कभी-कभार बनने वाले “अंडरकुक्ड कोक” से जुड़ा है। इस कोक का उपयोग ब्लास्ट फर्नेस में लौह अयस्क को पिघलाकर इस्पात उत्पादन के लिए किया जाता है। टाटा स्टील का कहना है कि बड़े पैमाने पर औद्योगिक उत्पादन के दौरान बेहद कम मामलों में कोई बैच पूरी तरह तैयार नहीं हो पाता, जिससे कुछ समय के लिए उत्सर्जन में मामूली वृद्धि हो सकती है। कंपनी का दावा है कि इसे पूरी तरह समाप्त करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।
आइजमुइडेन संयंत्र की केजीएफ-1 और केजीएफ-2 इकाइयों में हर वर्ष लगभग 1.35 लाख बैच तैयार किए जाते हैं। इतने बड़े उत्पादन के बावजूद अंडरकुक्ड कोक की घटनाएं बेहद सीमित हैं और इससे होने वाला अतिरिक्त उत्सर्जन भी बहुत कम समय तक रहता है।
टाटा स्टील ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण उसकी प्राथमिकता रही है। वर्ष 2020 में कई तकनीकी सुधार लागू किए गए, जिसके बाद इस तरह की घटनाओं में 98 प्रतिशत तक कमी आई है। वर्ष 2026 के आंकड़ों के मुताबिक कुल उत्पादन में अंडरकुक्ड कोक की औसत घटनाएं घटकर 0.011 प्रतिशत से भी कम रह गई हैं, जो उत्पादन प्रक्रिया में हुए सुधारों का संकेत है।
कंपनी ने यह भी जानकारी दी कि आइजमुइडेन स्थित केजीएफ-1 और केजीएफ-2 इकाइयों को भविष्य में स्थायी रूप से बंद किया जाएगा। यह फैसला टाटा स्टील के ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट के तहत लिया गया है। इन पुरानी इकाइयों की जगह आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाया जाएगा, जिससे कार्बन उत्सर्जन में और कमी लाई जा सके। फिलहाल कंपनी का कहना है कि वह कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हुए अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी।

