
चाईबासा : विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर कोल्हान विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग द्वारा जनसंख्या एक वरदान है या अभिशाप विषय पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में कुल 15 विद्यार्थियों ने भाग लिया और विषय के पक्ष एवं विपक्ष में अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए।
प्रतिभागियों ने अपने वक्तव्य में जनसंख्या के माल्थस सिद्धांत, जनसांख्यिकीय परिवर्तन, जनसंख्या नियंत्रण, आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण तथा मानव संसाधन जैसे विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
प्रतिभागी सुष्मिता हाइबुरु ने जनसंख्या के वरदान पक्ष का समर्थन करते हुए कहा कि जनसंख्या गरीबी का कारण नहीं है, बल्कि यदि जनसंख्या को कुशल एवं शिक्षित बनाया जाए तो भारत विश्व की सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन सकता है।
साइमन गुन्दुवा ने जनसंख्या के अभिशाप पक्ष में अपने विचार रखते हुए कहा कि अत्यधिक जनसंख्या के कारण संसाधनों पर दबाव बढ़ता है, पर्यावरण प्रभावित होता है, बेरोजगारी बढ़ती है तथा श्रम का उचित वितरण नहीं हो पाता, जिससे मजदूरी पर भी प्रभाव पड़ता है।
अमित ने जिम्मरमैन के संसाधन की परिभाषा – संसाधन होते नही बनाऐ जाते है को आधार मान कर शिक्षित एवम स्वस्थ मानव शक्ति का पक्ष रखा और जनसंख्या को वरदान बताते हुए कहा कि संसाधन स्वयं समस्या नहीं होते, बल्कि उनका समुचित प्रबंधन आवश्यक है। वहीं संध्या ने बढ़ती जनसंख्या को प्रदूषण, बाल विवाह एवं अन्य सामाजिक समस्याओं से जोड़ते हुए इसे अभिशाप बताया।
राखी बिरुवा ने जनसंख्या को उचित प्रबंधन की स्थिति में मानव संसाधन बताते हुए कहा कि यदि इसे तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जाए तो यह देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
राखी कुजुर् ने जनसंख्या के वरदान पक्ष में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्थिक विकास जनसंख्या पर निर्भर करता है। उन्होंने जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत आज विश्व को विशाल श्रमशक्ति उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में कुल प्रजनन दर (TFR) में कमी आ रही है, महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी बढ़ रही है तथा भविष्य में विकसित भारत के निर्माण में युवा जनसंख्या नवाचार और विकास की प्रमुख शक्ति बनेगी।
लेमबती ने चीन की जनसंख्या नीति का उदाहरण देते हुए जनसंख्या को प्रशिक्षित एवं कुशल मानव संसाधन के रूप में विकसित करने पर बल दिया।
कार्यक्रम के निर्णायक के रूप में अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू बाला खाखा एवं भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. सुनीता कुमारी उपस्थित रहे। उन्होंने प्रतिभागियों के तर्क, विषय की समझ एवं अभिव्यक्ति कौशल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में समसामयिक विषयों के प्रति वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विभाग के सहायक शिक्षक कंचन कच्छप ने धन्यवाद ज्ञापन किया और सभी प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बधाई दी गई।

