
Jamshedpur : टाटा वर्कर्स यूनियन में वेज रिवीजन समझौते के फिटमेंट स्लिप जारी होने के बाद कर्मचारियों के मुद्दों के साथ-साथ यूनियन की आंतरिक गुटबाजी भी सतह पर आती दिख रही है। यूनियन के पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट अरविंद पांडेय ने कोक प्लांट के कुछ कमेटी मेंबरों द्वारा अध्यक्ष को चुपचाप ज्ञापन सौंपे जाने पर सवाल उठाते हुए यूनियन नेतृत्व की कार्यशैली पर निशाना साधा है।
अरविंद पांडेय का कहना है कि कर्मचारियों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर सभी कमेटी मेंबरों की मांग के बावजूद अब तक प्रेसिडेंट की ओर से कमेटी मीटिंग नहीं बुलाई जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रेड रिवीजन के बाद एनएस कर्मचारियों की बंचिंग और वर्ष 2025 में कंपनी में शामिल हुए आरआर कर्मचारियों को एमजीबी का लाभ देने जैसे जटिल और गंभीर मामलों के समाधान के लिए अब तक कोई ठोस एवं औपचारिक पहल दिखाई नहीं दे रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन मुद्दों पर गंभीर कार्रवाई करने के बजाय कर्मचारियों को केवल आश्वासन देकर मामले को टालने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, कोक प्लांट के कुछ चुनिंदा और प्रेसिडेंट के करीबी कमेटी मेंबरों ने एनएस बंचिंग के मुद्दे पर अलग से ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि बंटी पांडेय, राजेश कुमार सिंह, सर्वेंद्र झा और उनके साथियों को छोड़कर अलग गुट बनाकर ज्ञापन देने की पहल की गई, जिसकी जानकारी सभी संबंधित कमेटी मेंबरों को नहीं थी।
‘अब राजनीति चरम पर दिखाई दे रही है’
पूर्व डिप्टी प्रेसिडेंट ने कहा कि वह इस मुद्दे को इसलिए सार्वजनिक कर रहे हैं क्योंकि अब यूनियन में राजनीति चरम पर दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, कोक प्लांट के साथ-साथ अन्य विभागों में भी कर्मचारियों के वास्तविक और गंभीर मुद्दों को प्राथमिकता देने के बजाय अलग-अलग स्तर पर गतिविधियां होती नजर आ रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा परिस्थितियों में कर्मचारियों के वास्तविक मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं या यूनियन की गुटबाजी और राजनीति? उन्होंने कहा कि समय इसका जवाब जल्द देगा।
हालांकि, अरविंद पांडेय के आरोपों पर टाटा वर्कर्स यूनियन अध्यक्ष अथवा संबंधित कमेटी मेंबरों की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

