
धनबाद : छाताबाद में जमीन धंसने का खौफनाक दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभी आशियाना बचाओ आंदोलन खत्म हुए 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि बुधवार रात काजू बागान हदहदिया इलाके में अचानक जमीन फट गई। देखते ही देखते 20 से 25 मीटर के इलाके में एक गहरा गोफ बन गया। हादसने की जगह से पास के तालाब का पानी सीधे इस गड्ढे में समाने लगा है। आबादी महज 200 मीटर दूर होने के कारण आसपास के परिवारों में हड़कंप मचा हुआ है। डेढ़ महीने के भीतर इस इलाके में यह तीसरी बार जमीन धंसी है।
अवैध खनन से खोखली हुई जमीन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बरसों पहले यहां अंडरग्राउंड माइनिंग चलती थी। खदान बंद होने के बाद कोयला माफियाओं ने बेखौफ होकर खदान के सुरक्षा पिलर तक काटकर निकाल लिए। नीचे का पूरा आधार खोखला होने की वजह से अब बार-बार जमीन धंस रही है।
आसपास है 9 हजार की आबादी

धंसान वाली जगह के पास ही वॉटर सप्लाई प्लांट, प्रज्ञा केंद्र और तालाब स्थित है। आसपास 8 से 9 हजार की आबादी रहती है। कोलियरी मैनेजर अमित कुमार का कहना है कि गोफ की घेराबंदी कर दी गई है और पानी का बहाव मोड़ा जा रहा है। उनके मुताबिक आबादी दूर है, इसलिए तुरंत कोई बड़ा खतरा नहीं है। गुरुवार से गड्ढा भरने का काम शुरू होगा। बीसीसीएल ने 19 अगस्त को ही इस इलाके को डेंजर जोन घोषित कर नोटिस चिपकाया था और लोगों से जगह खाली करने को कहा था।
रोजगार और सुरक्षा पर बढ़ा संकट
बीती 7 अगस्त को छाताबाद में जमीन धंसने से एक दर्जन से अधिक घर जमींदोज हो गए थे। इसके विरोध में चले लंबे आंदोलन के बाद डीजीएमएस ने आउटसोर्सिंग का काम रोक दिया था, जिससे 300 मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था। 25 अगस्त को समझौता होने पर आंदोलन खत्म हुआ, लेकिन अगले ही दिन फिर जमीन धंसने से स्थानीय लोगों की सुरक्षा और मजदूरों के भविष्य पर दोबारा अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।

