
रांची/बांकुड़ा: झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमाओं पर आतंक के पर्याय बने तीन बड़े माओवादियों ने अपने हथियार डाल दिए हैं। इन तीनों नक्सलियों ने पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में आत्मसमर्पण किया है। सुरक्षा बलों के लगातार बढ़ते दबाव के आगे इनके हौसले पस्त हो गए। फिर इन लोगों ने मुख्य धारा में वापसी का निर्णय लिया।
सरेंडर करने वालों में सबसे प्रमुख नाम रामप्रसाद मार्डी का है। रामप्रसाद पर सरकार ने 15 लाख रुपये का भारी इनाम घोषित कर रखा था। वह माओवादियों की रिजनल कमेटी का एक बेहद अहम सदस्य माना जाता था। इसके साथ ही उसकी पत्नी मीता ने भी पुलिस के सामने हाथ खड़े कर दिए हैं। मीता जोनल कमेटी की सदस्य है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम था। तीसरे नक्सली का नाम गौरी उर्फ बुल्लू है जो सबजोनल कमेटी का सदस्य है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन तीनों पर अपराध का लंबा इतिहास रहा है। तीनों के खिलाफ कुल मिलाकर 81 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
अकेले रामप्रसाद पर दर्ज हैं 44 गंभीर मामले
रामप्रसाद मार्डी मूल रूप से पूर्वी सिंहभूम जिले के झुझका गांव का निवासी है। पुलिस फाइलों में उसके खिलाफ अकेले 44 मुकदमे चल रहे हैं। उस पर हत्या और पुलिस टीमों पर जानलेवा हमला करने के दर्जनों आरोप हैं। इसके अलावा वह आईईडी ब्लास्ट और अवैध हथियार रखने के मामलों में भी नामजद है।
उसकी अपराध की कहानी साल 2007 से ही शुरू हो गई थी। उसका नेटवर्क पूर्वी सिंहभूम से लेकर सारंडा और कोल्हान के घने जंगलों तक फैला हुआ था। पटमदा, घाटशिला, गालूडीह और टोंटो जैसे कई थानों में उसके नाम की एफआईआर दर्ज हैं।
सुरक्षा बलों को कई बार पहुंचाया था भारी नुकसान
रामप्रसाद और उसके गिरोह ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 1 मार्च 2026 को मारंगपोंगा के जंगलों में पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ हुई थी। इस हिंसक झड़प में कोबरा बटालियन का एक जवान बुरी तरह घायल हो गया था। बाद में माओवादियों के बिछाए आईईडी की चपेट में आकर दो बड़े अधिकारी भी चोटिल हुए थे।
इससे पहले 19 सितंबर 2024 को तिरिलपोसी क्षेत्र में आईईडी ब्लास्ट किया गया था। उसमें भी बीडीडीएस टीम का एक जवान घायल हुआ था। वहीं जनवरी 2023 में तुम्बाहाका के जंगलों में लगातार कई धमाके हुए थे। उन हमलों में कोबरा के नौ जवानों को गंभीर चोटें आई थीं।
दस लाख की इनामी पत्नी मीता का भी खौफनाक आपराधिक रिकॉर्ड
रामप्रसाद की पत्नी मीता पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की रहने वाली है। वह भाकपा (माओवादी) संगठन में काफी सक्रिय भूमिका निभा रही थी। झारखंड सरकार ने उसकी गिरफ्तारी पर 10 लाख रुपये का इनाम तय किया था। मीता के खिलाफ अलग-अलग थानों में 19 मुकदमे दर्ज हैं। वह भी अपने पति के साथ मिलकर सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करती थी। 2023 के तुम्बाहाका धमाके और 2024 के तिरिलपोसी आईईडी ब्लास्ट में मीता की सीधी संलिप्तता पाई गई थी।
जवानों की शहादत में शामिल था तीसरा नक्सली गौरी
तीसरा नक्सली गौरी उर्फ बुल्लू बंगाल के झाड़ग्राम जिले का रहने वाला है। गौरी के खिलाफ भी 18 आपराधिक मामले दर्ज हैं। गौरी का नाम कई घातक आईईडी हमलों से जुड़ा रहा है। 10 अक्टूबर 2025 को समठा के जंगलों में एक भयंकर आईईडी धमाका हुआ था। उस हादसे में सीआरपीएफ के एक इंस्पेक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उसी दौरान हुए दूसरे धमाके में सुरक्षा बलों का एक हेड कांस्टेबल शहीद हो गया था। उस घटना के पीछे गौरी का ही हाथ था। इसके बाद 6 नवंबर 2025 को कुलापुबुरू के जंगलों में बड़ी मुठभेड़ हुई थी। मुठभेड़ के बाद सर्च ऑपरेशन में सुरक्षा बलों को राइफलें, कारतूस, डेटोनेटर, जिलेटिन और लैपटॉप मिले थे।
सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ी सफलता
तीनों नक्सली पिछले कई सालों से सीमावर्ती इलाकों में खौफ का दूसरा नाम बने हुए थे। लेकिन पिछले कुछ समय से जंगलों में सुरक्षा बलों का सख्त पहरा बढ़ गया था। पुलिस और सुरक्षा बल लगातार सर्च अभियान चला रहे थे।
इस कारण माओवादी संगठन का ढांचा पूरी तरह कमजोर पड़ने लगा था। उनके पास से रसद और हथियारों की आपूर्ति भी कटने लगी थी। चारों तरफ से घिर जाने के कारण उनके पास सरेंडर के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। इन तीनों का हथियार डालना सुरक्षा बलों के लिए एक बहुत बड़ी सफलता माना जा रहा है।

