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Loud Snoring : खर्राटों के साथ दिनभर आती है नींद? गंभीर बीमारी का हो सकता संकेत

by Rakesh Pandey
Loud Snoring
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जमशेदपुर : खर्राटों को आमतौर पर गहरी नींद या थकान से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति रातभर सोने के बाद भी दिन में बार-बार ऊंघता रहता है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। यह समस्या नींद की खराब गुणवत्ता या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया जैसी स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी हो सकती है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के फिजिशियन डॉ. बलराम झा के अनुसार, लगातार तेज खर्राटे आना और दिन में अत्यधिक नींद महसूस होना शरीर में किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण बने रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

खर्राटे आने पर क्यों प्रभावित होती है नींद

सोते समय जब गले और सांस की नली के आसपास के ऊतक ढीले पड़ जाते हैं, तो हवा के आवागमन में रुकावट पैदा हो सकती है। इसी दौरान होने वाले कंपन से खर्राटों की आवाज निकलती है। कुछ लोगों में सांस का रास्ता बार-बार आंशिक या पूरी तरह बंद हो जाता है। इससे नींद टूटती रहती है, भले ही व्यक्ति को इसका एहसास न हो।
रातभर इस तरह नींद बाधित होने पर शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप सुबह उठने के बाद थकान, सिर भारी लगना और दिन में बार-बार नींद आने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

स्लीप एपनिया भी हो सकता है कारण

तेज और नियमित खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकना, घुटन महसूस होना या अचानक जाग जाना ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में शरीर तक ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित होती है और दिमाग को सांस दोबारा शुरू करने के लिए व्यक्ति को नींद से जगाना पड़ता है।
बार-बार ऐसा होने से नींद के अलग-अलग चरण पूरे नहीं हो पाते। इसका असर व्यक्ति की एकाग्रता, याददाश्त, कार्यक्षमता और व्यवहार पर भी पड़ सकता है।

दिन में दिखाई दे सकते हैं ये लक्षण

नींद की गुणवत्ता खराब होने पर व्यक्ति सुबह उठने के बाद भी तरोताजा महसूस नहीं करता। इसके अलावा दिनभर सुस्ती, काम करते समय ऊंघना, ध्यान लगाने में परेशानी, चिड़चिड़ापन और सुबह सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कुछ लोगों को वाहन चलाते या लंबे समय तक एक स्थान पर बैठकर काम करते समय भी नींद आने लगती है। ऐसी स्थिति दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन कारणों से बढ़ सकती है परेशानी

अधिक वजन, नाक बंद रहना, गले या जबड़े की बनावट, एलर्जी और सोने की गलत स्थिति खर्राटों की समस्या बढ़ा सकती है। पीठ के बल सोने पर भी कुछ लोगों में खर्राटे तेज हो जाते हैं। डॉक्टर संबंधित कारणों और लक्षणों को देखते हुए जांच की सलाह दे सकते हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए

यदि खर्राटों की आवाज बहुत तेज हो, नींद में सांस रुकती दिखाई दे, घुटन के साथ नींद खुले या पर्याप्त सोने के बावजूद दिन में अत्यधिक नींद आए, तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समस्या का पता लगाने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार स्लीप स्टडी या दूसरी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।

कारण के अनुसार होता है उपचार

खर्राटों का उपचार उनके कारण पर निर्भर करता है। वजन नियंत्रित रखना, करवट लेकर सोना, नियमित दिनचर्या अपनाना और नाक संबंधी समस्या का इलाज कराना लाभकारी हो सकता है। स्लीप एपनिया की पुष्टि होने पर डॉक्टर सीपीएपी मशीन या अन्य उपयुक्त उपचार की सलाह दे सकते हैं। डॉ. बलराम झा के अनुसार, कभी-कभार खर्राटे आना हमेशा गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन तेज खर्राटों के साथ दिन में लगातार नींद और थकान महसूस हो तो समय पर जांच जरूरी है।

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