
जमशेदपुर : पूरी रात सोने के बाद आमतौर पर शरीर और आंखों को आराम महसूस होना चाहिए। लेकिन कई लोगों को पर्याप्त नींद लेने के बावजूद आंखों में थकान, भारीपन, जलन, सूखापन या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी बनी रहती है। इसके पीछे केवल नींद की कमी ही जिम्मेदार नहीं होती। लंबे समय तक स्क्रीन देखना, ड्राई आई, नजर से जुड़ी समस्या, एलर्जी और रोजमर्रा की कुछ आदतें भी आंखों को थका सकती हैं।
स्क्रीन के कारण बढ़ रहा डिजिटल आई स्ट्रेन
स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टेलीविजन का लगातार इस्तेमाल आंखों की थकान का प्रमुख कारण बन चुका है। स्क्रीन देखते समय पलकें झपकाने की सामान्य गति कम हो जाती है। इससे आंखों की सतह सूख सकती है और जलन, धुंधलापन, सिरदर्द या बेचैनी महसूस होने लगती है। लगातार काम करने के बजाय बीच-बीच में स्क्रीन से नजर हटाकर आंखों को आराम देना जरूरी है।
ड्राई आई भी हो सकती है वजह
आंसुओं का पर्याप्त मात्रा में न बनना या उनका तेजी से सूख जाना ड्राई आई की समस्या पैदा कर सकता है। एयर कंडीशनर, पंखे की सीधी हवा, प्रदूषण, लंबे समय तक ध्यान लगाकर काम करना और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां इसे बढ़ा सकती हैं। ऐसी स्थिति में पर्याप्त नींद के बावजूद आंखें थकी, रूखी या भारी लग सकती हैं।
नजर की कमजोरी को न करें अनदेखा
यदि चश्मे की जरूरत हो और समय पर जांच न कराई जाए, तो चीजों पर फोकस करने के लिए आंखों को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। पुराना या गलत नंबर वाला चश्मा पहनने से भी परेशानी बढ़ सकती है। दोनों आंखों के बीच तालमेल की समस्या होने पर पढ़ते या स्क्रीन देखते समय थकान महसूस हो सकती है।
एलर्जी और जीवनशैली का भी असर
धूल, धुआं, परागकण या अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व आंखों में खुजली, लालिमा और भारीपन ला सकते हैं। बार-बार आंखें रगड़ने से परेशानी और बढ़ सकती है। पर्याप्त पानी न पीना, बहुत अधिक कैफीन लेना, खराब रोशनी में काम करना और बिना विश्राम लंबे समय तक पढ़ना भी आंखों पर दबाव डालता है।
आंखों को राहत देने के आसान उपाय
स्क्रीन पर काम करते समय नियमित अंतराल पर दूर की वस्तु देखें और बार-बार पलकें झपकाएं। स्क्रीन को आंखों से उचित दूरी पर रखें तथा कमरे में पर्याप्त रोशनी बनाए रखें। शरीर को हाइड्रेट रखें और आंखों को बेवजह रगड़ने से बचें। अच्छी नींद के साथ स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना भी जरूरी है।
इन लक्षणों पर तुरंत लें सलाह
आंखों की थकान लगातार बनी रहे या इसके साथ अचानक दृष्टि कम होना, तेज दर्द, अत्यधिक लालिमा, रोशनी की चमक अथवा आंखों के सामने तैरते धब्बे अचानक बढ़ जाएं, तो जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित उपचार संभव है।

