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Jharkhand Crime : IAS पूजा सिंघल को शीर्ष अदालत से नहीं मिली राहत, चलता रहेगा मुकदमा

Jharkhand Crime : मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि मुकदमा चलाने की मंजूरी का सवाल केवल कागजी नियम नहीं है, बल्कि यह तथ्यों और साक्ष्यों पर निर्भर करता है।

by Kanchan Kumar
IAS Pooja Singhal Supreme Court Case Jharkhand
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रांची/नई दिल्ली : मनरेगा योजना से जुड़े करोड़ों रुपये के हेरफेर और मनी लॉन्ड्रिंग के संगीन आरोपों में घिरीं झारखंड कैडर की चर्चित प्रशासनिक अधिकारी पूजा सिंघल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। शीर्ष अदालत ने उनके खिलाफ निचली अदालत में चल रही अदालती कार्रवाई पर रोक लगाने या उसे खारिज करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत के इस सख्त रुख के बाद अब विशेष पीएमएलए कोर्ट में उनके खिलाफ मुकदमे की सुनवाई पहले की तरह ही आगे बढ़ती रहेगी।

​अदालत में इस मुद्दे पर छिड़ी बहस

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से यह दलील रखी गई थी कि एक सरकारी कर्मचारी होने के नाते उनके खिलाफ मुकदमा चलाने से पहले प्रशासन से औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी, जो कानूनी प्रक्रिया की धारा 197 के तहत अनिवार्य है। बचाव पक्ष का कहना था कि यह पूरा मामला केवल उनके आधिकारिक दायित्वों से जुड़ा हुआ है।

​वहीं दूसरी ओर, केंद्रीय जांच एजेंसी (ईडी) की तरफ से पैरवी कर रहे वकीलों ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निचली अदालत बहुत पहले ही आरोपों का संज्ञान ले चुकी थी और अब कार्रवाई काफी आगे बढ़ चुकी है।

​अदालत ने क्या रुख अपनाया?

मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि मुकदमा चलाने की मंजूरी का सवाल केवल कागजी नियम नहीं है, बल्कि यह तथ्यों और साक्ष्यों पर निर्भर करता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि जांच के दौरान 19 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी नकदी बरामद हुई थी, जिसे पहली नजर में सिर्फ आधिकारिक कामकाज का हिस्सा मानकर अनदेखा नहीं किया जा सकता।

​न्यायालय ने यह तय किया कि इस चरण पर मामले को खारिज नहीं किया जाएगा। मुकदमे की सुनवाई के दौरान जब गवाहियां और सबूत पेश किए जाएंगे, तब सही समय पर इस बात का फैसला किया जाएगा कि क्या यह कृत्य आधिकारिक ड्यूटी के तहत आता था या निजी अनियमितता थी।

पूरे मामले को ऐसे समझिए

मनरेगा कोष में लगभग 18 करोड़ रुपये के कथित घोटाले से जुड़ी जांच के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने मई 2022 में आईएएस पूजा सिंघल के ठिकानों पर व्यापक छापेमारी की थी।

जांच एजेंसियों के समक्ष संतोषजनक जवाब न मिलने और करोड़ों की बेहिसाब नकदी की बरामदगी के बाद उन्हें 11 मई 2022 को गिरफ्तार कर लिया गया था। करीब दो साल से अधिक का समय सलाखों के पीछे बिताने के बाद उन्हें जमानत मिली थी।

इससे पहले पूजा सिंघल ने झारखंड हाईकोर्ट का रुख कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि व्यक्तिगत स्तर पर किए गए अवैध कार्यों में कानूनी संरक्षण की आड़ नहीं ली जा सकती।

ईडी द्वारा अदालत में दाखिल किए गए विस्तृत आरोपपत्र में केवल पूजा सिंघल ही नहीं, बल्कि उनके पति अभिषेक झा, चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) सुमन कुमार, कनिष्ठ अभियंता राम बिनोद सिन्हा सहित कई अन्य अभियंताओं को भी अभियुक्त बनाया गया है।
​शीर्ष अदालत के इस हालिया फैसले के बाद अब सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा और कानूनी प्रक्रिया अपने तय रास्ते पर आगे बढ़ेगी।

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