
जमशेदपुर : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों से घिरे रहने के बावजूद कई व्यक्ति भीतर से अकेलापन महसूस करते हैं। लंबे समय तक बनी रहने वाली यह स्थिति केवल मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि दिल की सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकती है। शहर के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार, लगातार अकेलापन तनाव बढ़ाकर रक्तचाप, हृदय की धड़कन और जीवनशैली को प्रभावित कर सकता है।
तनाव के कारण बढ़ सकता है रक्तचाप
लंबे समय तक अकेलेपन या सामाजिक अलगाव में रहने पर शरीर इसे तनाव की स्थिति के रूप में ले सकता है। इससे कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ सकते हैं। परिणामस्वरूप दिल की धड़कन तेज होने, घबराहट महसूस होने और रक्तचाप अनियंत्रित रहने जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
धमनियों और रक्त प्रवाह पर असर
लगातार मानसिक तनाव शरीर में सूजन बढ़ाने वाली प्रक्रियाओं को सक्रिय कर सकता है। इससे धमनियों की अंदरूनी परत प्रभावित होने और उनमें वसा जमा होने का जोखिम बढ़ सकता है। समय के साथ यह स्थिति रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न कर सकती है। इसके अलावा तनाव के कारण खून के थक्के बनने की आशंका भी बढ़ सकती है, जो गंभीर परिस्थितियों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन सकती है।
बिगड़ सकती हैं रोजमर्रा की आदतें
डॉ. संतोष गुप्ता बताते हैं कि अकेलापन सीधे ही नहीं, बल्कि खराब जीवनशैली के माध्यम से भी दिल को नुकसान पहुंचा सकता है। अकेलापन महसूस करने वाले लोग कई बार व्यायाम छोड़ देते हैं, अनियमित भोजन करने लगते हैं या अधिक मीठा, तला-भुना और जंक फूड खाने लगते हैं। कुछ लोगों में धूम्रपान और शराब का सेवन भी बढ़ सकता है। नींद की कमी और शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोगों के खतरे को और गंभीर बना सकती है।
इन संकेतों पर तुरंत दें ध्यान
लगातार थकान, ठीक से नींद न आना, सुबह उठने के बाद भी ताजगी महसूस न होना, सीने में दर्द या भारीपन, सांस फूलना, घबराहट, दिल की धड़कन अचानक तेज होना और रक्तचाप का अनियंत्रित रहना चेतावनी के संकेत हो सकते हैं। सीने में तेज दर्द, पसीना, सांस लेने में परेशानी या दर्द का हाथ और जबड़े तक फैलना गंभीर संकेत हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
सामाजिक जुड़ाव भी है जरूरी
दिल और मन को स्वस्थ रखने के लिए परिवार तथा मित्रों से नियमित बातचीत करें। प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट पैदल चलें, योग या हल्का व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें। सामाजिक समूहों से जुड़ना, स्क्रीन टाइम कम करना और अपनी परेशानी किसी भरोसेमंद व्यक्ति से साझा करना भी लाभकारी हो सकता है। अकेलापन लगातार बना रहे या अवसाद जैसे लक्षण दिखाई दें, तो विशेषज्ञ से परामर्श लेने में देरी न करें।

