
Jamshedpur : धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर लंबे समय से बनी पर्यावरणीय और प्रशासनिक अड़चनें अब दूर होती नजर आ रही हैं। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से उठाई गई 19 आपत्तियों पर झारखंड सरकार ने विस्तृत जवाब और संशोधित अनुपालन रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट को केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर भी अपलोड किया गया है। अब परियोजना को स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लियरेंस मिलने का इंतजार है। इसके बाद एयरपोर्ट के पुनर्विकास की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
पुरानी हवाई पट्टी का होगा पुनर्विकास
वन विभाग ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि धालभूमगढ़ में किसी नए जंगल को काटकर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की योजना नहीं है। प्रस्तावित स्थल पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विकसित की गई पुरानी हवाई पट्टी पहले से मौजूद है। अब इसी परित्यक्त एयरस्ट्रिप का पुनर्विकास किया जाना है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जमशेदपुर का सोनारी एयरपोर्ट घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में स्थित है। रनवे छोटा होने और विस्तार के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण यहां एटीआर-72 जैसे व्यावसायिक विमानों का संचालन संभव नहीं है। ऐसे में जमशेदपुर से करीब 55 किलोमीटर दूर धालभूमगढ़ को एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त विकल्प माना गया है।
99.256 हेक्टेयर वन भूमि परियोजना में शामिल
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के लिए 99.256 हेक्टेयर वन भूमि प्रस्तावित है। इसके बदले नियम के तहत 198.512 हेक्टेयर अवकृष्ट वन भूमि पर 10 वर्षीय क्षतिपूरक वनरोपण किया जाएगा। इसके लिए चाकुलिया वन क्षेत्र के बाघघोरी, करोडिया, सांपधारा, कुचीकनाली, बड़ीहा, झारिया और गुगुड़िया समेत कई स्थानों को चिह्नित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक परियोजना क्षेत्र में कुल 79,332 पेड़ और बांस हैं। इनमें अधिकांश पेड़ 10 से 30 सेंटीमीटर व्यास वाले छोटे आकार के हैं। बिजली और पानी की लाइनें मौजूदा राइट-ऑफ के जरिए ही पहुंचाने की योजना है, जिससे अतिरिक्त वन भूमि की जरूरत नहीं पड़ेगी।
परियोजना का संशोधित कॉस्ट-बेनीफिट रेशियो 1:48.6 बताया गया है। यानी परियोजना से होने वाले संभावित आर्थिक और सामाजिक लाभ को वन भूमि के उपयोग की तुलना में महत्वपूर्ण माना गया है।
हाथी कॉरिडोर से 13 से 17 किलोमीटर दूर
परियोजना को लेकर हाथी कॉरिडोर और मानव-हाथी संघर्ष से संबंधित आपत्तियों पर भी वन विभाग ने अपना पक्ष रखा है। रिपोर्ट के अनुसार घाटशिला-काकड़ाझोर हाथी कॉरिडोर परियोजना स्थल से करीब 15 किलोमीटर, मुसाबनी-चाकुलिया कॉरिडोर 13 किलोमीटर और डुमरिया-कुंदलुका-मुरकानजिया कॉरिडोर करीब 17 किलोमीटर दूर है।
वन विभाग के अनुसार पिछले पांच वर्षों में परियोजना क्षेत्र के आसपास मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं सीमित रही हैं। इसके बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर परियोजना एजेंसी अपने खर्च पर विस्तृत साइट-स्पेसिफिक वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान तैयार करेगी। इसमें हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके आवास पर संभावित प्रभाव को कम करने के उपाय शामिल होंगे। अब सभी प्रमुख आपत्तियों पर जवाब और अनुपालन रिपोर्ट केंद्र के समक्ष रखे जाने के बाद धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के लिए स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लियरेंस महत्वपूर्ण अगला कदम बन गया है। मंजूरी मिलने के बाद एयरपोर्ट के पुनर्विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुल सकता है।

