
रांची: राजधानी रांची के थानों और सड़कों पर लगे सीसीटीवी कैमरे सिर्फ दिखाने के लिए हैं या वे सच में काम भी कर रहे हैं? इस गंभीर सवाल पर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को कड़ा रुख दिखाया है। एक नाबालिग लड़के को कथित रूप से अवैध हिरासत में रखने के मामले में जब पुलिस अदालत को सीसीटीवी फुटेज नहीं सौंप सकी, तो अदालत का गुस्सा फूट पड़ा।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक को 12 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश होने का फरमान सुनाया है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, फिरोज अंसारी और अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में एक याचिका (हेवियस कॉर्पस) दाखिल कर आरोप लगाया था कि डोरंडा थाना पुलिस ने उनके 17 साल के बेटे को 4 सितंबर 2026 से बिना किसी एफआईआर के गैर-कानूनी तरीके से थाने में बैठाकर रखा।
आरोप यह भी है कि पुलिस ने लड़के के आधार कार्ड को नजरअंदाज कर उसकी उम्र 19 साल बता दी और उसे जेल भेज दिया। जबकि परिवार द्वारा पेश दस्तावेजों के मुताबिक उसकी जन्मतिथि 21 अप्रैल 2009 है, यानी घटना के वक्त वह नाबालिग था।
कोर्ट में फुटेज नहीं दे पाई पुलिस
जब इस मामले की सुनवाई शुरू हुई, तो हाईकोर्ट ने सच जानने के लिए डोरंडा थाना प्रभारी को घटना के दिन की सीसीटीवी फुटेज जमा करने का आदेश दिया था। लेकिन सुनवाई के दौरान जब थाना प्रभारी कोर्ट पहुंचे, तो वे फुटेज पेश करने में नाकाम रहे। इसे लेकर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि राजधानी जैसे शहर की सड़कों, चौराहों और थानों के कैमरे चालू स्थिति में होना बेहद जरूरी है।
पहले भी दिए गए थे आदेश
अदालत ने याद दिलाया कि इससे पहले भी रांची एसएसपी को सभी थानों के सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया था, लेकिन अब तक इस पर कोई नया अपडेट नहीं दिया गया। इसी लापरवाही को देखते हुए अब सीधे गृह सचिव और DGP को जवाब देने के लिए तलब किया गया है। मामले में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील सूरज किशोर प्रसाद और आयुषी अमन ने पैरवी की।
Read Also: Wildlife Hunting : धमाकों से दहला हजारीबाग का जंगल, तीन बेजुबान जानवरों की दर्दनाक मौत, ग्रामीणों ने खदेड़ा तो सामान छोड़ भागे शिकारी

