
चाईबासा : भारतीय इस्पात प्राधिकरण सेल की मेघाहातुबुरू लौह अयस्क खदान में दीपावली की छुट्टी की तारीख को लेकर प्रबंधन और मजदूर यूनियनों के बीच उपजा विवाद वार्ता के बाद समाप्त हो गया। शुक्रवार को सभी यूनियनों के बैनर तले मजदूरों ने एकजुट होकर खदान में चक्का जाम कर दिया, जिससे दोपहर 1:00 बजे से 3:30 बजे तक उत्पादन और अयस्क की माल ढुलाई पूरी तरह ठप रही।
ढाई घंटे चले इस आंदोलन के बाद बैकफुट पर आए खदान प्रबंधन ने यूनियन प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया। वार्ता के दौरान प्रबंधन ने सर्कुलर जारी करने में हुई अपनी चूक स्वीकार की और आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं दोहराई जाएगी। इसके अलावा, प्रबंधन ने मजदूरों को दीपावली गिफ्ट देने पर भी अपनी सहमति जताई।
सर्कुलर में बार-बार बदलाव से भड़का मजदूरों का गुस्सा
यूनियन प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया कि स्टैंडिंग ऑर्डर के तहत कर्मचारियों को वर्ष में चार प्रमुख त्योहारों होली, विजयादशमी, विश्वकर्मा पूजा और दीपावली की फेस्टिवल हॉलिडे छुट्टी मिलती है। यदि इन त्योहारों के दिन कर्मचारी ड्यूटी करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त छुट्टी देने का नियम है। परंपरा के अनुसार प्रबंधन और यूनियनों की आपसी बैठक में विचार-विमर्श के बाद ही त्योहार की छुट्टियों की तिथि एक-दो दिन आगे या पीछे तय की जाती है और आधिकारिक सर्कुलर जारी होता है।इस बार प्रबंधन ने 4 नवंबर 2026 को सर्कुलर संख्या MIOM/HR/2026/2937 जारी कर 8 नवंबर को रविवार होने के कारण दीपावली की छुट्टी 9 नवंबर (सोमवार) तय की थी। हालांकि, इसके अगले ही दिन (5 नवंबर) प्रबंधन ने बिना यूनियनों को विश्वास में लिए नया सर्कुलर संख्या MIOM/HR/2026/2947 जारी कर छुट्टी की तिथि बदलकर 11 नवंबर कर दी। इस एकतरफा फैसले से नाराज सभी यूनियनों ने शुक्रवार को संयुक्त रूप से काम ठप कर आंदोलन का रास्ता चुना।
भविष्य में आपसी सहमति से तय होंगी छुट्टियां
सफल वार्ता के बाद प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि आगे से त्योहारों की छुट्टियों का कोई भी सर्कुलर जारी करने से पहले यूनियनों के साथ बाकायदा बैठक की जाएगी और सर्वसम्मति से ही तिथियों का निर्धारण होगा।इस संयुक्त आंदोलन और वार्ता में प्रमुख मजदूर नेता आफताब आलम, अमित झा, गुंजन कुमार, दीपक राम, इलियास चाम्पिया, इंतखाब आलम, संतोष पंडा, जगन्नाथ चतर, धनुर्जय लागुरी, अनिल टोपनो, धनीराम लकड़ा, राज नारायण शर्मा और कुलदीप सिंह समेत खदान के सैकड़ों श्रमिक शामिल रहे।

