
Jamshedpur : मारांग बुरु पारसनाथ को संथाल समाज की धार्मिक धरोहर बताते हुए इसे संरक्षित करने और आधिकारिक रूप से धार्मिक स्थल घोषित करने की मांग तेज हो गई है। इसी मुद्दे को लेकर रविवार को करनडीह जुगसलाई स्थित दिसोम जाहेरथान में कोल्हान स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में नवंबर में होने वाले मारांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक पारगना बाबा दसमत हांसदा के नेतृत्व में हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि आगामी 4 और 5 नवंबर को गिरिडीह जिले के मधुबन में दो दिवसीय मारांग बुरु धोरोमगाढ़ महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में संथाल समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल होंगे।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि संथाल समाज की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं में पारसनाथ की चोटी स्थित मारांग बुरु जुग जाहेरथान का विशेष महत्व है। समाज की ओर से लंबे समय से यहां पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना किए जाने की बात कही गई। इस दौरान धार्मिक परंपराओं के साथ संथाल समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को संरक्षित और मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
पारगना बाबा दसमत हांसदा ने समाज के लोगों से महासम्मेलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा के साथ सम्मेलन में पहुंचने का आह्वान किया। बैठक में कोल्हान स्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन भी किया गया। प्रतिनिधिमंडल के विस्तार की जिम्मेदारी देश पारानिक बाबा नवीन मुर्मू को सौंपी गई।
बैठक में समाज की ओर से मारांग बुरु पारसनाथ को संथाल समाज का धार्मिक स्थल घोषित करने, लुगु बुरु और मारांग बुरु को धार्मिक धरोहर के रूप में अधिसूचित करने, पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने तथा धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की मांग उठाई गई।

