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सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मणिपुर के लिए बनायी तीन पूर्व महिला जजों की समिति, हिंसाग्रस्त मणिपुर में पीड़ितों को राहत, उनके पुनर्वास व हर्जाने की समिति करेगी निगरानी

by Rakesh Pandey
Supreme Court
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नई दिल्ली: मणिपुर हिंसा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ( SC ) शुरू से ही सख्त रहा है। ऐसे में अब देश की सबसे बड़ी अदालत ने हिंसाग्रस्त मणिपुर में पीड़ितों को राहत, उनके पुनर्वास व हर्जाने की निगरानी के लिए हाईकोर्ट की तीन महिला जजों की एक समिति बनाई है। कमेटी के सदस्यों के नाम की घोषणा व जिम्मेदारी खुद कोर्ट ने तय की है। इसके तहत यह समिति मणिपुर की स्थितियों का आकलन कर रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा सुप्रीम कोर्ट राज्य में कानून के शासन में विश्वास की भावना बहाल करने का प्रयास करेगा। क्योंकि वहां की स्थित भयावह है।

यह बात सामने आ रही है कि इस सीमावर्ती राज्य में अराजकता, अधिक से अधिक लोगों के मारे जाने, आगजनी व उत्पात मचाया जा रहा है। यहां तक की महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने से संबंधित वीडियो भी आया है जो बेहद परेशान करने वाला है। इस सुनवाई के दौरान मणिपुर के मुख्य सचिव विनीत जोशी और डीपीपी राजीव सिंह भी मौजूद थे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद दोनों ने राज्य में दाखिल एफआईआर का ब्योरा प्रस्तुत किया।

जानिए समिति के सदस्यों का नाम:

SC ने जो समिति बनायी है उसमें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की पूर्व चीफ जस्टिस गीता मित्तल को अध्यक्ष बनाय गया है । वहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त जस्टिस शालिनी पी जोशी व दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जस्टिस आशा मेनन अन्य सदस्य होंगी।

सीबीआई जांच की भी होगी निगरानी, पूर्व डीजीपी को मिली जिम्मेदारी:

सुप्रीम कोर्ट मणिपुर हिंसा मामले में किस तरह गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कोर्ट ने राज्य में आपराधिक मामलों की सीबीआई जांच की निगरानी की जिम्मेदारी महाराष्ट्र के पूर्व डीजीपी दत्तात्रेय पडसलगीकर को सौंपी है। SC ने कहा, विश्वास की भावना सुनिश्चित करने के लिए पुलिस उपाधीक्षक रैंक से ऊपर के कम से कम पांच अधिकारी विभिन्न राज्यों से प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में जोड़े जाएंगे। इसके साथ ही 11 एफआईआर सीबीआई को हस्तांतरित की जाएंगी। वहीं 42 एसआईटी उन मामलों को देखेगी, जिन्हें सीबीआई को स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। एसआईटी की निगरानी के लिए मणिपुर के बाहर से आए छह डीआइजी रैंक के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गयी है।

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