रांची : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्यरत कर्मियों का कार्यकाल फिलहाल सीमित अवधि के लिए ही बढ़ाया जा रहा है, जिससे राज्यभर में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। यह स्थिति केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न संविदा आधारित कर्मियों पर भी लागू हो रही है।
कई जिलों से इस संबंध में जानकारी मिल रही है। हाल में ही धनबाद और खूंटी से इस तरह के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि अन्य जिलों में भी इसी प्रकार सीमित अवधि विस्तार की तैयारी चल रही है। इसी क्रम में बेयरफुट टेक्नीशियन (बीएफटी) का भी कार्यकाल अल्प अवधि के लिए ही नवीनीकृत किया जा रहा है। जिला ग्रामीण विकास शाखा, धनबाद द्वारा जारी आदेश के अनुसार विभिन्न प्रखंडों में कार्यरत बीएफटी का नवीनीकरण अधिकतम 6 जून 2026 तक अथवा योजना के चालू रहने तक (जो पहले हो) किया गया है।
आदेश में निरसा, बाघमारा, कलियासोल, टुंडी, तोपचांची, पूर्वी टुंडी और धनबाद सदर जैसे प्रखंडों के कर्मियों का उल्लेख है। यह निर्णय प्रखंड विकास पदाधिकारियों की अनुशंसा और विभागीय दिशा-निर्देशों के आधार पर लिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मी का कार्य असंतोषजनक पाया जाता है या अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो उसकी सेवा अवधि बीच में ही समाप्त की जा सकती है। सभी प्रखंडों को सरकारी निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है।
कार्यकाल को केवल जून तक सीमित रखने के फैसले के बाद अटकलें तेज हो गई हैं। कुछ जगहों पर 21 जून तक विस्तार की चर्चा है, जबकि खूंटी जिले से जारी आदेश में सेवा अवधि ‘योजना के चालू रहने तक’ बताई गई है। इससे योजना की निरंतरता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इसी बीच यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि मनरेगा के स्थान पर केंद्र सरकार की नई योजना ‘विकसित भारत जी राम जी’ लागू जल्द की जाएगी। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल मनरेगा से जुड़े विभिन्न कर्मियों के बीच अनिश्चितता का माहौल है। कई स्थानों पर कर्मी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और 12 मार्च से हड़ताल पर भी हैं, जिससे योजना के संचालन पर असर पड़ रहा है।
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