जामताड़ा : जामताड़ा में सोमवार को आदिवासी संगठनों ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर और कुड़मी समाज को आदिवासी का दर्जा देने की मांग के विरोध में प्रदर्शन किया। जामताड़ा में गांधी मैदान से डीसी कार्यालय तक निकाले गए जुलूस में हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों ने सूर्या हांसदा की मौत को फर्जी एनकाउंटर करार दिया है। इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। साथ ही कुड़मी समाज को आदिवासी दर्जा देने की मांग के खिलाफ राज्य सरकार को चेतावनी दी कि अगर उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो झारखंड में बालू और कोयले के परिवहन को पूरी तरह रोक दिया जाएगा।
इस जनआंदोलन का नेतृत्व सांवता सुसार आखड़ा समिति के संयोजक मंगल सोरेन, सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. श्यामदेव हेम्ब्रम, देस मांझी परगना बाईसी के अध्यक्ष जगदीश मुर्मू और मुख्य सलाहकार सुनील हेम्ब्रम ने किया।
प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि झारखंड की संस्कृति, भाषा और परंपरा विशिष्ट है। इसे किसी भी बाहरी समुदाय से जोड़ा नहीं जा सकता। कुड़मी समाज को आदिवासी दर्जा देने का कोई ऐतिहासिक या सांस्कृतिक आधार नहीं है, और यह झारखंड की मूल पहचान के साथ छेड़छाड़ होगी।
डॉ. श्यामदेव हेम्ब्रम ने कहा कि सूर्या हांसदा एनकाउंटर की सीबीआई जांच और कुड़मी समाज की मांग को खारिज करना ही अब आदिवासी समाज की दो प्रमुख मांगें हैं। अगर सरकार ने इन्हें नहीं माना, तो आदिवासी समाज झारखंड की सभी राजनीतिक पार्टियों का बहिष्कार करेगा और आर्थिक नाकेबंदी शुरू करेगा।
रैली गांधी मैदान में सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुई और टावर चौक, स्टेशन रोड, दुमका रोड होते हुए समाहरणालय मैदान तक पहुंची, जहां जनसभा आयोजित की गई। कार्यक्रम के अंत में आदिवासी संगठनों ने जामताड़ा डीसी के माध्यम से राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा।

