
चाईबासा : दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आगजनी की घटनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला मुख्यालय चाईबासा में अग्निशमन विभाग एवं मुफस्सिल थाना की पुलिस ने सतर्कता बढ़ा दी है। इसी क्रम में अग्निशमन पदाधिकारी और मुफस्सिल थाना प्रभारी ने विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों का संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान पंडालों में अग्निशमन सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया और पूजा समिति के सदस्यों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पूजा समितियों को अग्निशमन सुरक्षा संबंधी सलाह पत्र प्रदान किया। इसके साथ ही पंडालों में आग से बचाव के लिए आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने पर जोर दिया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूजा पंडालों में अग्निशमन उपकरणों की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए और उन्हें हमेशा क्रियाशील अवस्था में रखा जाना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।
विद्युत तारों की नियमित जांच और निकासी मार्ग खुला रखने का निर्देश
अधिकारियों ने पूजा समिति के सदस्यों को विद्युत तारों एवं अस्थायी बिजली कनेक्शनों की नियमित जांच कराने, ज्वलनशील पदार्थों को सुरक्षित दूरी पर रखने तथा पंडालों में आने-जाने के रास्तों और आपातकालीन निकासी मार्गों को अवरोधमुक्त रखने का निर्देश दिया। इसके अलावा आग लगने की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों और सुरक्षा उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई।
अग्निशमन पदाधिकारी ने कहा कि आगजनी की बड़ी घटनाएं अक्सर छोटी-छोटी लापरवाहियों के कारण होती हैं। ऐसे में पूजा पंडालों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। अग्निशमन उपकरणों को चालू हालत में रखना और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी करना किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सुरक्षा मानकों का पालन करने की अपील
वहीं, मुफ्फसिल थाना प्रभारी ने पूजा समिति के सदस्यों से सुरक्षा व्यवस्था के प्रति पूरी तरह सजग रहने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए पूजा समितियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य दुर्गा पूजा के दौरान सुरक्षित वातावरण बनाए रखना और श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के पूजा-अर्चना का अवसर उपलब्ध कराना है।
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